धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। दमोह विधानसभा सीट के उपचुनाव में हार को भाजपा संगठन अब कई मायनों में अवसर बनाने की तैयारी में है। हार पर उठ रहे असंतोष के स्वर को दबाने के लिए असंतुष्टों को दरकिनार करने की तैयारी है। दरअसल, पार्टी दो निशाने साधना चाहती है। इससे नई पीढ़ी के लिए जहां अवसर बढ़ेंगे, वहीं असंतुष्ट दिग्गजों की अगली पीढ़ी को मौका देने के दबाव से पार्टी मुक्त हो सकेगी। इससे पार्टी में वंशवाद पर अंकुश लगेगा। पार्टी मानकर चल रही है कि हार पर विरोध के स्वर उठाने वालों को संगठन ने काफी कुछ दिया है, फिर भी वे अनुशासन तोड़ रहे हैं, तो उन्हें मुख्यधारा में साथ लेकर कैसे चला जा सकता है। 

एक तीर से दो निशाने: नई पीढ़ी को मौका, वंशवाद से किनारा 

दमोह में पार्टी ने कांग्रेस छोड़कर आए राहुल लोधी को मौका दिया था। तैयारियों से संगठन को अनुमान था कि यह सीट भाजपा के खाते में आएगी, लेकिन कांग्रेस सीट बचाने में कामयाब रही। लोधी ने हार का ठीकरा यहां से सात बार भाजपा विधायक रहे जयंत मलैया और उनके समर्थकों पर फोड़ दिया। चूंकि दमोह सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री प्रहलाद पटेल और जयंत मलैया के सियासी संबंध सहज नहीं हैं, तो संगठन से जयंत मलैया को नोटिस और उनके पुत्र सहित पांच मंडल अध्यक्षों के निलंबन ने तूल पकड़ लिया।

पार्टी में नहीं थम रही दमोह उपचुनाव में हार की रार

कांग्रेस से आए नेताओं को महत्व देने से अनमने चल रहे नेताओं का सब्र उस वक्त जवाब दे गया, जब मलैया के खिलाफ कार्रवाई की गई। अनुशासित होने का दावा करने वाली भाजपा में हर रोज संगठन को निशाने पर लेने वाले बयान आने लगे। पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी, कुसुम महदेले और अजय विश्नोई सहित कई नेताओं ने संगठन के निर्णय को सवालों से घेरा।

महदेले इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की पहली नदी जोड़ो योजना केन-बेतवा पर भी सवाल उठा चुकी हैं। ऊर्जा विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र सिंह सिसोदिया भी पार्टी लाइन से अलग बात उठाते रहे हैं। पार्टी ऐसे नेताओं को भी दरकिनार करने पर विचार कर रही है।

इधर, संगठन सूत्रों का कहना है कि पार्टी में अपने विचार रखने का सबको अधिकार है, लेकिन उचित मंच पर न कि सार्वजनिक बयानबाजी का। खुलेआम सवाल उठाने से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ता है। आने वाले समय में खंडवा लोकसभा सीट सहित कई विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। नगरीय निकाय चुनाव भी सामने हैं। ऐसे में पार्टी अनुशासन तोड़ने वालों को साथ लेकर कैसे आगे बढ़ सकती है। 

भारतीय जनता पार्टी अपनी अनुशासन की परंपरा और कार्यपद्धति के अनुसार हर मामले में सामूहिक निर्णय लेती है। संगठन सर्वोपरि है। यह किसी व्यक्ति की इच्छा या महत्वाकांक्षा से ऊपर है। संगठन की कार्यपद्धति जेबी नहीं हो सकती। 

रजनीश अग्रवाल, प्रदेश मंत्री, भाजपा

 

Edited By: Arun Kumar Singh