मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

नई दिल्ली, जेएनएन। लोकसभा अध्यक्ष का आसन संभालते ही ओम बिरला ने साफ साफ संकेत दिया है कि सदन के अंदर अनुशासन उनकी प्राथमिकता में होगा। औपचारिक रूप से कामकाज के पहले ही दिन उन्होंने सदन के अंदर यह जता दिया कि सदस्य चाहे कोई भी हो, उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि बहस के बीच गपशप बर्दाश्त नहीं की जाएगी और न ही वेल में आकर नारेबाजी और पोस्टर वार।

दो दिन पहले ही नए अध्यक्ष का चुनाव हुआ है। दूसरे दिन संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति का अभिभाषण था। इस लिहाज से शुक्रवार को पहली बार सदन पूरे दिन चला। सुबह इसकी शुरुआत के बाद जब तीन तलाक विधेयक पेश होना था तो लोकसभा अध्यक्ष कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को याद दिलाना नहीं भूले कि अपनी कुर्सी पर आकर बैठें और अगर गपशप करनी है तो बाहर जाकर करें। तत्काल सत्तापक्ष के भी कुछ सांसद जो गपशप में व्यस्त थे, सतर्क हो गए।

बाद में पत्रकारों के सवाल के जवाब में बिरला ने कहा कि वह केवल नियम कानून के हिसाब से सदन चलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'वेल में जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे क्यों लगाए जाने चाहिए। क्या वह जगह पोस्टर दिखाने के लिए है? जिसे यह सब करना है वह बाहर जाकर कर सकते हैं।'

यह पूछे जाने पर कि परंपरा के अनुसार सदन में सबसे पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा होती है फिर उन्होंने तीन तलाक विधेयक पेश करने की इजाजत क्यों दी? बिरला ने कहा कि यह सदन की कार्य सलाहकार समिति का फैसला था जिसमें सभी दलों के सदस्य होते हैं। बिरला ने कहा कि सदन सभी सदस्यों के लिए है। वे अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन शोर शराबे से इसे बाधित करना उचित नहीं है।

मालूम हो कि दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य विषयों के साथ-साथ सदन की सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए भी एक बैठक बुलाई थी। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने संदेश दिया था कि जनता का दिल काम से जीता जा सकता है, शोर शराबे से नहीं। बताते हैं कि इसी क्रम में उन्होंने सामने बैठे ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की ओर इशारा करते हुए कहा था कि उनके सांसद वेल में नहीं आते हैं, लेकिन फिर भी बार-बार ओडिशा में सरकार बना रहे हैं।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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