जम्मू, नवीन नवाज। अपनी बर्फीली चोटियों और बौद्ध मठों के लिए जाना जाने वाला लद्दाख एक बार फिर सुर्खियों में है। लद्दाखवासी जम्मू-कश्मीर से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। विकास में अनदेखी के मसले पर तेज हुए आंदोलनों ने बर्फबारी के बीच लद्दाख के सियासी पारे को गरमा दिया है। इन आंदोलनों में सब अपना नफा-नुकसान जोड़ रहे है। राज्यपाल प्रशासन ने गत दिनों लद्दाख क्षेत्र को अलग डिवीजन बनाने की तैयारी शुरू की है। सूत्रों के अनुसार इस पर सरकारी मुहर लग चुकी है और केवल घोषणा की औपचारिकता शेष है, पर कुछ सियासी दलों के विरोध को देखते हुए यह मामला फिलहाल लंबित रखा गया है। पीडीपी ने ध्रुवीकरण का दांव चल भी दिया है।

मौजूदा समय राज्य में दो प्रमुख प्रशासकीय इकाइयां अर्थात संभाग हैं। जम्मू और कश्मीर डिवीजन। फिलहाल लद्दाख के दोनों जिले लेह व कारगिल कश्मीर डिवीजन का हिस्सा हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा देने का वादा किया था। पिछले माह लद्दाख के भाजपा सांसद थुपस्तान छिवांग के इस्तीफे ने इस मुद्दे को हवा दी है। माना जा रहा है कि भाजपा इस मामले में डैमेज कंट्रोल के तहत लद्दाख को अलग डिवीजन का दर्जा दिलाना चाहती है। इससे पूर्व क्षेत्र की अपेक्षाओं को देखते हुए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 27 सितंबर को लेह व कारगिल स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों के विधायी, कार्यकारी और वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए थे। इसके तहत दोनों परिषदों को अपने क्षेत्र में कर लगाने, कर जमा करने के अलावा विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मियों की निगरानी व नियंत्रण के साथ ही केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत निधि आवंटन में वृद्धि का अधिकार मिल गया था।

भौगोलिक तौर पर भी हैं तीन हिस्से
भौगोलिक, भाषाई, सामाजिक परिस्थितियों को देखें तो जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है-जम्मू, कश्मीर और लद्दाख। जम्मू संभाग में रावी दरिया से लेकर पीरपंजाल के दक्षिण का पूरा इलाका है, जबकि कश्मीर संभाग में पीरपंजाल के बाएं छोर से लेकर सियाचिन की बर्फीली चोटियां हैं। जिस तरह से पीरपंजाल कश्मीर घाटी को जम्मू संभाग से अलग करने वाली प्राकृतिक दीवार है, उसी तरह जोजिला दर्रा कश्मीर घाटी को लद्दाख से अलग करता है।

1951 से चला आ रहा है आंदोलन
लद्दाख में कश्मीरी वर्चस्व से मुक्ति और अलग केंद्र शासित राज्य के दर्जे की मांग 1951 से चली आ रही है। यह क्षेत्र अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पिछड़ा रहा है। लद्दाख के सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सवा लाख अधिकारियों व जवानों पर आधारित राज्य पुलिस में 20 हजार भी लद्दाखी नहीं हैं। सचिवालय में लेह-कारगिल के कर्मचारियों की संख्या न के बराबर है। पूरे क्षेत्र में कोई मेडिकल, इंजीनियरिंग कालेज व विश्वविद्यालय नहीं है। अधिकांश बस्तियों में बिजली की रोशनी बीते एक दशक में ही पहुंची। पनबिजली और सौर ऊर्जा की तमाम संभावनाओं का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। अफसरशाही के राज्य कैडर में लेह-कारगिल का प्रतिनिधित्व नाममात्र है।

क्या होगा अलग डिवीजन का फायदा
लद्दाख को अलग डिवीजन बनाने से क्षेत्र में कश्मीरी वर्चस्व घटेगा। लगभग 40 सरकारी विभागों के संभागीय कार्यालय, निदेशालय लेह व कारगिल में बनेंगे। एक अलग पुलिस रेंज भी बनेगी और आइजीपी रैंक के अधिकारी भी तैनात होंगे। अलग मंडलायुक्त होगा। इसके अलावा प्रशासन में लेह-कारगिल के लोगों की भागेदारी बढ़ सकती है।

नव पाषाण काल से है लद्दाख
लद्दाख में मानव जीवन की उपस्थिति और सभ्यता सिंधु घाटी की तरह ही पुरातन है। यह पहली सदी में कुषाण राजवंश के अधीन रहा है। यह सिल्क रूट का भी एक अहम हिस्सा रहा है। जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा यह 1834 में बना, जब तत्कालीन डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह के सेनापति जनरल जोरावर सिंह ने इसे जीत लिया। 1955 में चीन ने जिनजिआंग व तिब्बत को जोड़ने के लिए इस इलाके में सड़क बनानी शुरू की। भारत ने भी इसी दौरान श्रीनगर-लेह सड़क बनाई जिससे श्रीनगर और लेह के बीच की दूरी सोलह दिनों से घटकर दो दिन रह गई। जोजीला दर्रे के आरपार 6.5 किलोमीटर लंबी एक सुरंग का प्रस्ताव है, जिससे यह मार्ग जाड़ों में भी खुला रहेगा।

पीडीपी नहीं इस पहल के पक्ष में
पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने लद्दाख को अलग डिवीजन बनाने का विरोध किया है, लेकिन उनका यह विरोध अलग डिवीजन के खिलाफ कम कश्मीर और जम्मू में वोटों का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए ज्यादा है। यही स्थिति नेशनल कांफ्रेंस की है।

लद्दाख का क्षेत्र भी बड़ा
जम्मू- कश्मीर राज्य में लद्दाख का कुल क्षेत्रफल 59146 वर्ग किलोमीटर है, जबकि कश्मीर संभाग का 16351 वर्ग किलोमीटर और जम्मू संभाग का क्षेत्रफल 26293 वर्ग किलोमीटर है। राज्य में 22 जिले हैं। इनमें से दस जिले जम्मू संभाग में हैं और कश्मीर में लद्दाख के दो जिलों समेत 12 जिले हैं। लद्दाख में सदियों पुराने बौद्ध मठ हैं। दलाई लामा साल में लगभग दो माह लद्दाख में रहते हैं। इसके अलावा लेह में स्थित बेली ब्रिज विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित पुल है जो समुद्रतल से 5602 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। लद्दाख में गर्मियों में तापमान 35 डिग्री तक पहुंच जाता है, जबकि सर्दियों में तापमान शून्य से 20 या 25 डिग्री तक नीचे रहता है।  

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