नई दिल्ली, जेएनएन। शनिवार की सुबह महाराष्ट्र की राजनीतिक में एक बड़ा भूचाल लेकर आई। सुबह-सुबह ही देवेंद्र फडणवीस ने राजभवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही एनसीपी के अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। महाराष्ट्र की राजनीति में इतना बड़ा उलटफेर दो भतीजों ने कर दिखाया है। जो कि किसी ने सोचा भी नहीं था। 

जहां कल तक शिवसेना से उद्धव ठाकरे का सीएम बनना तय था। तो वहीं, अब शिवसेना इस पूरे खेल में अपने को ठगा महसूस कर रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में इतना बड़ा उलटफेर दो भतीजों ने कर दिखाया है। इनमें एक एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार हैं तो दूसरे दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे हैं, जो कि एनसीपी से विधायक हैं।

दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे धनंजय मुंडे भी इस उलटफेर में सबसे बड़ा रोल निभाया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि धनंजय मुंडे ने शपथ ग्रहण के पहले विधायकों को एकजुट किया और अपने घर पर बुलवाया था। यहीं से सभी विधायक राज्यपाल के घर पहुंचे और मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई। 

वहीं, भाजपा संग मिलकर सरकार गठन में बड़ी भूमिका निभाने वाले एनसीपी के नेता धनंजय मुंडे एनसीपी की बैठक के लिए वाईवी चव्हाण केंद्र पहुंचे हैं। मुंडे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार संग यहां बैठक होनी है। इससे पहले धनंजय मुंडे आज सुबह अजीत पवार के साथ दिखाई दिए थे।

माना जा रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति में जो हुआ है। धनंजय ने भाजपा और एनसीपी की सरकार बनाने में चाणक्य की भूमिका निभाई है।

धनंजय मुंडे का राजनीतिक करियर

धनंजय मुंडे ने अपने सियासी सफर की शुरुआत भाजपा युवा मोर्चा की राजनीति से शुरू किया था। इसके बाद साल 2012 में उन्होंने शरद पवार के सामने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ज्वॉइन कर ली। धनंजय मुंडे बीजेपी के पूर्व दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे और बीजेपी नेता पंकजा मुंडे के चचेरे भाई हैं। पंकजा बीजेपी की पिछली सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। इस बार के विधानसभा चुनाव में धनंजय मुंडे ने अपनी चचेरी बहन पंकजा मुंडे को पराली विधानसभा में 30 हजार से ज्यादा वोटों से हराया है।

Posted By: Dhyanendra Singh

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