तिरुअनंतपुरम, प्रेट्र। नागरिकता संशोधन कानून पर केरल में वाम मोर्चा की सरकार से मोर्चा ले रहे राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में 'मूक दर्शक' नहीं बने रहेंगे। वह इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि देश के कानून का पालन हो।

संविधान का पालन हो कर रहेगा

बेंगलुरु से लौटने पर रविवार की शाम को केरल के राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान ने कहा कि संविधान का पालन होना ही है। यह कोई निजी लड़ाई नहीं है। संविधान का पालन हो कर रहेगा। इसे सुनिश्चित करने के लिए मैं मूक दर्शक नहीं बना रहूंगा। उन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर प्रहार करते हुए कहा कि जनता से जुड़े मामले और सरकार के कामकाज को किसी व्यक्ति और राजनीतिक दल के जुनून पर नहीं चलाया जा सकता है। हर किसी को नियमों का आदर करना चाहिए।

इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके राज्यपाल ने कहा कि इसके साथ ही राजभवन ने राज्यपाल को बताए बिना केरल सरकार के नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब की है।

ज्ञात हो कि केरल पहला राज्य है जिसने सीएए का विरोध करते हुए विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है। केरल की एलडीएफ सरकार ने विगत 13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सीएए को चुनौती देते हुए इसे संविधान का उल्लंघन करार देने की अपील की थी। कामकाज के नियम की धारा 34(2) की उपधारा 5 के तहत राज्य सरकार को राज्यपाल को उन मामलों की सूचना देनी चाहिए जो राज्य और केंद्र के संबंधों को प्रभावित करते हैं। जबकि राज्य सरकार का कहना है कि उन्होंने राज्यपाल के दफ्तर को कोई चुनौती नहीं दी है। केरल के कानून मंत्री एके बालन ने शनिवार को कहा था कि सरकार खान के उठाए सभी सवालों का जवाब देगी।

आरिफ मोहम्‍मद खान ने जताई थी नाराजगी

पिछले दिनों केरल सरकार के राज्‍यपाल आरिफ मोहम्‍मद खान ने कहा था कि मुझे सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस बारे में प्रोटोकॉल का ध्‍यान रखना चाहिए था। 

संवैधानिक प्रमुख होने के बावजूद मुझे इस बारे में समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला। जाहिर है, मैं सिर्फ एक रबर स्टांप नहीं हूं।' राज्‍यपाल ने कहा था कि यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, साथ ही यह शिष्टाचार का भी उल्लंघन है। मैं इस पर गौर करूंगा कि क्या राज्य सरकार राज्यपाल की मंजूरी के बिना सुप्रीम कोर्ट में जा सकती है। यदि अनुमोदन नहीं, तो वे मुझे सूचित कर सकते थे। 

केरल के राज्‍यपाल ने कहा- CAA के खिलाफ प्रस्‍ताव की कोई संवैधानिक वैधता नहीं 

पिछले दिनों संसद से पास होने वाले नागरिकता संशोधन एक्‍ट को वापस लेने की मांग वाले एक प्रस्‍ताव को केरल सरकार ने विधानसभा में पारित किया था। माकपा नीत सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस नीत विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने केरल विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन किया। सिर्फ भाजपा के सदस्य इस प्रस्‍ताव का विरोध करते नजर आए। मुख्‍यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि केरल में कोई भी डिटेंशन सेंटर नहीं बनेगा। पिनराई विजयन ने कहा कि वह नागरिकता संशोधन कानून को केरल में लागू नहीं होने देंगे। 

इसके जवाब में केरल के राज्‍यपाल आरिफ मोहम्‍मद खान ने कहा था कि इस प्रस्‍ताव की कोई कानूनी या संवैधानिक वैधता नहीं है, क्योंकि नागरिकता विशेष रूप से एक केंद्रीय विषय है। इसलिए असल में इस प्रस्‍ताव का कोई मतलब नहीं है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि कोई भी राज्‍य इस कानून को लागू करने से मना नहीं कर सकता है। राज्‍यों को हर हाल में नागरिकता संशोधन कानून को लागू करना पड़ेगा। राज्‍यपाल ने कहा, 'ये बड़ी चौंकाने वाली बात है कि जिस सरकार ने संविधान की शपथ ली है, वो गैर संवैधानिक बात कर रही है। राज्‍य सरकार कह रही है कि नागरिकता संशोधन कानून राज्य में नहीं लागू होने देंगे।'  

सीएए के खिलाफ प्रस्‍ताव छपवाना अवांछनीय 

इसके अलावा राज्‍यपाल आरिफ मुहम्मद खान ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ केरल सरकार के विज्ञापनों को पूरी तरह से अवांछनीय बताया है। राज्यपाल ने कहा है कि राजनीतिक प्रचार के लिए सरकारी पैसे से विज्ञापन निकलवाना गलत है।

Posted By: Arun Kumar Singh

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