नई दिल्ली [नीलू रंजन]। बार-बार कश्मीर घाटी में स्कूलों और कालेजों को बंद करने का आह्वान करने और युवाओं को पत्थरबाजी व आतंकवाद के लिए उकसाने वाले अलगाववादी नेताओं के बच्चे न सिर्फ विदेश में पढ़ रहे है, बल्कि वहीं नौकरी भी कर रहे हैं। हर दिन के बंद से घाटी में बेपटरी हुई जिन्दगी से दूर अलगाववादी नेताओं के बच्चे सुख और सुकून की जिंदगी जी रहे हैं।

ध्यान देने की बात है कि गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में अलगाववादी नेताओं के इस पाखंड का खुलासा किया था। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए अमित शाह ने बताया था कि पिछले 70 सालों में किस तरह कश्मीर में आम आवाम को जरूरी सहूलियतों से भी मरहूम रखा गया।

उन्होंने बताया कि कश्मीरियत और कश्मीरियों की बात करने वाले अलगाववादी नेता आए दिन स्कूलों व कालेजों को बंद करने का ऐलान करते हैं। बच्चों और युवाओं को पढ़ाई से दूर कर उन्हें पत्थरबाजी के लिए उकसाते हैं। जबकि खुद अपने बच्चों को विदेशों में भेज कर अच्छी से अच्छी शिक्षा का बंदोबस्त कर रहे हैं। उनके परिवार के लोग कश्मीर घाटी से दूर बड़ी संख्या में विदेशों में बसे हुए हैं। छानबीन के बाद ऐसे अलगाववादी नेताओं के चेहरे सामने आने लगे हैं, जो अपने बच्चों का भविष्य संवारकर घाटी के बच्चों के हाथों में पत्थर थमा रहे हैं।

विदेश में हैं 112 अलगाववादियों के 220 बच्चे
कश्मीर घाटी में सक्रिय 112 अलगाववादी नेताओं के कम से कम 220 बच्चे, रिश्तेदार या करीबी विदेशों में पढ़ रहे हैं या सुकून की जिंदगी जी रहे हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद इनमें से ज्यादातर बच्चे विदेश में ही नौकरी कर रहे और रह भी रहे हैं। इन अलगाववादी नेताओं में हुर्रियत के भी तमाम बड़े नेता शामिल हैं। इनके बच्चों को न तो कश्मीरियत से मतलब है और न ही घाटी में पनप रहे आतंकवाद से इनका कोई नाता है। इसी से इन अलगाववादी नेताओं के दोहरे चरित्र का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो बात-बात पर स्थानीय युवाओं को कानून हाथ में लेने के लिए उकसाते हैं। उन्हें देशविरोधी गतिविधियों में धकेल देते हैं। अमित शाह ने राज्यसभा में पेश रिपोर्ट में कश्मीर के 130 हुर्रियत नेताओं की भी कुंडली पेश की है, जिनके बच्चे विदेश में सेट हैं।

प्रमुख अलगाववादी और उनके बच्चे
एसएएस गिलानी: अपने बच्चों को विदेश में सेटल कर, स्थानीय लोगों को बरगलाने वालों में सबसे बड़ा नाम घाटी के सबसे बड़े अलगाववादी नेता एसएएस गिलानी का है। गिलानी के बेटे नईम गिलानी ने न सिर्फ पाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की, बल्कि अब वहीं रावलपिंडी में डाक्टर की पैक्टिस कर रहा है। गिलानी की बेटी सऊदी अरब में शिक्षक और दामाद इंजीनियर है। एसएएस गिलानी के दामाद अल्ताफ अहमद शाह की एक बेटी तुर्की में पत्रकार और दूसरी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। एसएएस गिलानी के एक दूसरे दामाद जहूर गिलानी का बेटा सउदी अरब में है और वहीं एयरलाइंस में नौकरी कर रहा है।

मीरवाइज उमर फारूखः इनकी बहन रुबिया फारूख अमेरिका में डाक्टर है।

आसिया अंद्राबीः घाटी में महिलाओं के बीच अलगाववाद की अलख जगाने वाली और फिलहाल जेल में बंद दुखतरन-ए-मिल्लत की प्रमुख आसिया अंद्राबी का एक बेटा मलेशिया में पढ़ रहा है। दूसरा बेटा आस्ट्रेलिया में है। आसिया अंद्राबी की बहन मरियम अंद्राबी भी अपने परिवार के साथ मलेशिया में रहती है।

असरफ सेहरईः हुर्रियत के गिलानी धड़े के महासचिव असरफ सेहरई ने भी अपने बच्चों की तालीम का पूरा ख्याल रखा। उसके दोनों बच्चे खालिद और आबिद असरफ सउदी अरब में नौकरी करते हैं।

मोहम्मद शफी रेशीः इनका बेटा अमेरिका में पीएचडी कर रहा है।

अशरफ लायाः इनकी बेटी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

बिलाल लोनः इनकी एक बेटी और दामाद लंदन में बस गए हैं, वहीं छोटी बेटी आस्ट्रेलिया में पढ़ रही है।

मोहम्मद यूसुफ मीरः मुस्लिम लीग नेता मोहम्मद यूसुफ मीर और फारूख गतपुरी की बेटी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

ख्वाजा फिरदौस वानीः डेमोक्रेटिक पोलिटिकल मूवमेंट के प्रमुख ख्वाजा फिरदौस वानी ने भी बेटे को पाकिस्तान में ही मेडिकल की पढ़ाई के लिए भेज दिया है।

निसान हुसैन रादरः वाहिदत-ए-इस्लामी के नेता निसान हुसैन रादर का बेटा और बेटी दोनों इरान में बस गए हैं और बेटी वहीं नौकरी कर रही है।

Posted By: Amit Singh

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