नई दिल्ली, जेएनएन। Karnataka Trust Vote: कर्नाटक में 14 महीने पुरानी कुमारस्वामी सरकार आखिरकार गिर ही गई। कांग्रेस और जेडीएस सरकार अपने पहले दिन से ही संकट में रही। पिछले साल मई में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को बहुमत हासिल नहीं हुआ। 225 सीटों वाली इस विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी रही उसे 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और सत्ता का दावा ठोक दिया, लेकिन सीएम बीएस येदियुरप्पा ने सदन में फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 78 विधायकों के साथ कांग्रेस और 37 विधायकों के साथ जेडीएस सरकार बनाने के लिए साथ आए और सरकार बनाई। 23 मई 2018 को कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने। 

सिद्धारमैया शुरू से नाखुश 
सरकार बनने के बाद से ही कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता सिद्धारमैया नाखुश थे। उन्‍होंने तत्‍कालीन कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को सलाह दी कि वह गठबंधन समाप्‍त कर दें, लेकिन राहुल ने उनकी बात नहीं सुनी। 

संकट से हुई साल 2019 की शुरुआत 
गठबंधन सरकार के लिए साल 2019 की शुरुआत ही संकट से हुई। 15 जनवरी 2019 को सात कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी। उन्‍हें पवई के एक होटल ले जाया गया। इसके बाद एएच विश्‍वनाथ ने जेडीएस अध्‍यक्ष पद से 4 जून 2019 को इस्‍तीफा दे दिया। उन्‍होंने जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार और मुख्‍यमंत्री कुमारस्‍वामी पर निशाना साधा। 

विधायकों के इस्‍तीफे से हिली सरकार 
कर्नाटक में ताजा उथल पुथल की शुरुआत 6 जुलाई को हुई जब सरकार के 12 विधायकों ने अपनी सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया। इससे पहले कांग्रेस के विधायक आनंद सिंह ने अपनी सदस्‍यता से इस्‍तीफा दिया था। इन 13 विधायकों के बाद निर्दलीय विधायक नागेश ने भी इस्‍तीफा दे दिया। नागेश मुंबई के लिए रवाना हो गए। यहां पहले से ही एक होटल में बागी विधायक मौजूद थे। निर्दलीय विधायक नागेश ने गवर्नर को पत्र लिखकर कांग्रेस-जेडीएस सरकार से समर्थन वापस लेने के साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि भाजपा समर्थन मांगती है तो वह उसके साथ हैं। 

Posted By: Tanisk

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