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कर्नाटक में खोई सियासी जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी भाजपा, डिफेंसिव मोड में कांग्रेस

Published: Sun, 13 Sep 2026 07:02 PM (IST)

कर्नाटक में भाजपा अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है, जिससे कांग्रेस और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार डिफेंसिव मोड में आ गए हैं।

कर्नाटक में बदलने लगा सियासी विमर्श (फाइल फोटो)

कर्नाटक में बदलने लगा सियासी विमर्श (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भाजपा कर्नाटक में अपनी खोई सियासी जमीन वापस पाने में जुटी।

  2. कांग्रेस और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अब डिफेंसिव मोड में।

  3. वाल्मीकि निगम घोटाले ने सरकार पर भारी दबाव बनाया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुद्दों के चयन और संगठन की सटीक रणनीति राजनीतिक विमर्श कैसे मौसम की तरह बदलती है, यह कर्नाटक में इन दिनों साफ दिखाई दे रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में बतौर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और जून 2026 में मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने के बाद जिस तरह से डीके शिवकुमार ने राज्य सभा चुनाव और फिर विधान परिषद चुनाव में भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) को बैकफुट पर धकेला।

उससे यही विमर्श खड़ा होने लगा कि इस कुशल रणनीतिकार के सामने इन दलों का दोबारा पैर जमाना अब आसान नहीं है। मगर, अभी तीन महीने ही बीते थे कि कर्नाटक का राजनीतिक विमर्श फिर से करवट लेता दिख रहा है।

दो ताजा ऐसी घटनाएं हैं, जिनमें राज्य की सियासी पिच पर भाजपा के 'बाउंसर' पर कांग्रेस या कहें कि खुद सीएम शिवकुमार 'डिफेंस' करते दिखाई दिए। प्रभावी मुद्दों और सटीक रणनीति से लगातार सरकार को बैकफुट पर धकेलते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने पार्टी को वापस खड़ा कर दिया है।

कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री में डीके शिवकुमार को कुशल संगठक, परिश्रमी नेता माना जाता है। राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वह सीएम पद के दावेदार थे, लेकिन वरिष्ठता क्रम और गांधी परिवार की पसंद में पूर्व सीएम सिद्दमैया ने उन्हें पीछे छोड़ दिया।

हालांकि, आंतरिक संघर्ष करते रहे शिवकुमार ने आखिरकार तीन साल बाद 2026 में मुख्यमंत्री की कुर्सी ले ही ली। उसके बाद से कांग्रेस का बड़ा धड़ा आश्वस्त हो गया कि अब पार्टी राज्य में इतने मजबूत पैर जमा लेगी कि भाजपा या जेडीएस के लिए मुकाबला आसान नहीं हाेगा। भाजपा के अंदर भी आपसी लड़ाई और सघन हो गई। लेकिन सही प्लानिंग ने अब विमर्श बदल दिया है।

यूं तो कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप सिद्दरमैया के समय भी लगते रहे, लेकिन जिस तरह से शिवकुमार के सीएम बनने के बाद भाजपा ने महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में 89 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का आरोप मंत्री बी. नागेंद्र पर लगाते हुए रायचूर से बल्लारी तक बल्लाचरी चलो पदयात्रा की घोषणा की, उससे सरकार दबाव में दिखी। यात्रा शुरू होने से पहले ही मंत्री पद से नागेंद्र का इस्तीफा हो गया।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजयेंद्र के लिए यह बड़ी जीत दो कारणों से थी। एक तो सरकार दबाव में दिखी और दूसरा पार्टी के अंदर उनका समर्थन करने के लिए दूसरे नेताओं को भी खड़ा होना पड़ा। बेशक, यात्रा का मुख्य उद्देश्य यही था, लेकिन भाजपा ने यात्रा स्थगित नहीं की और अन्य मुद्दों को उठाते हुए यात्रा शुरू कर दी। इसी दौरान राज्य में सूखाग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण मुख्यमंत्री ने शुरू कर दिया।

विजयेंद्र ने इस मुद्दे को भी लपकते हुए यात्रा में इसे उठाना शुरू कर दिया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जाने की बजाए सीएम हवाई सर्वे कर रहे हैं, इसका क्या औचित्य है? इस पर भी सरकार तुरंत दबाव में आई और सीएम ने किसानों के बीच जाकर जमीनी सर्वे व संवाद शुरू कर दिया।

अभी यह दो ही ताजा घटनाक्रम हैं, लेकिन यह विमर्श बदलकर यह संदेश देने के लिए पर्याप्त हैं कि भाजपा ने वापसी की राह बनाना शुरू कर दिया है। अब कुछ समय बाद ग्रेटर बंगलुरू के स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं और डेढ़ साल में विधानसभा चुनाव। उसमें दोनों दलों की रणनीति की अगली परीक्षा बाकी है।