नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचा कर्नाटक का सियासी संकट अब खत्म होने के नजदीक पहुंच गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 बागियों ने मुंबई से बेंगलुर पहुंचकर शाम 6 बजे स्पीकर आर. रमेश कुमार से मुलाकात की और उन्हें नए सिरे से अपने इस्तीफे सौंप दिए। कोर्ट ने स्पीकर को इन इस्तीफों पर शुक्रवार को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। नए सिरे से इस्तीफे मिलने के बाद स्पीकर ने कहा कि वे यह देखेंगे कि इन सदस्यों ने दबाव में तो यह कदम नहीं उठाया है।

स्पीकर ने बताया कि जिन विधायकों के इस्तीफे निर्धारित प्रारूप में नहीं थे, वे अब सही प्रारूप में प्राप्त हो गए हैं। वह परखेंगे कि इस्तीफे स्वेच्छा से दिए गए हैं और प्रामाणिक हैं। इसके बाद ही वह न्यायोचित फैसला लेंगे जो कुछ के लिए सुविधाजनक और कुछ के लिए असुविधाजनक हो सकता है।

स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की परवाह न करते हुए कहा कि तत्काल फैसला लेने से इन्कार किया और कहा कि उनसे यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वह बिजली की गति से काम करें।

मुलाकात के बाद रमेश कुमार ने पत्रकारों को बताया, 'विधायक मुझसे मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि वे इस्तीफा देना चाहते हैं। मैंने कहा कि वे दे सकते हैं.. उन्होंने मुझसे उन्हें स्वीकार करने के लिए कहा। यह ऐसे नहीं हो सकता क्योंकि मुझे देखना पड़ेगा कि वे प्रामाणिक हैं या नहीं, स्वेच्छा से दिए गए हैं अथवा नहीं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि वह नियमों के मुताबिक फैसला करेंगे। इसके अलावा पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी कराई है जिसकी रिकॉर्डिग सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाएगी।

स्पीकर ने यह भी बताया कि उन्होंने विधायकों से कुछ सवाल पूछे थे जिसके उन्होंने जवाब दिए। रमेश कुमार ने कहा कि वह ताजा राजनीतिक हालात के लिए जिम्मेदार नहीं हैं और न ही उसके निष्कर्ष के लिए। हालांकि मुलाकात से पहले उन्होंने कहा था कि विधायकों के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से स्थिति 'संदेहास्पद' प्रतीत हो रही है। उनका कहना था कि विधायकों को उन्होंने कभी (कार्यालय) आने से नहीं रोका। उन्हें नहीं पता कि वे उनसे मिलने के लिए सुप्रीम कोर्ट क्यों गए।

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बागी विधायकों की लुकाछिपी का खेल एक तरह से बंद कर दिया। 10 बागियों ने बुधवार को याचिका दायर कर कहा था कि स्पीकर उनके इस्तीफे मंजूर करने की बजाए रोड़े डाल रहे हैं। उन्हें इस्तीफे तत्काल मंजूर करने और बागियों को अयोग्य घोषित करने से रोकने का आदेश देने का आग्रह किया।

कोर्ट ने बागियों के वकील मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया कि याचिका दायर करने वाले 10 बागी विधायक गुरुवार शाम 6 बजे तक स्पीकर से मुलाकात करें। राज्य के डीजीपी इन विधायकों की सुरक्षा के प्रबंध करें। इस आदेश के बाद शाम करीब 4 बजे कांग्रेस-जेडीएस के 10 बागी विधायक विशेष विमान से मुंबई से बेंगलुर पहुंचे और स्पीकर रमेश कुमार को विधिवत प्रारूप में नए सिरे से इस्तीफे सौंप दिए। स्पीकर को यही मुख्य ऐतराज था कि 14 में से नौ के इस्तीफे विधिवत प्रारूप में नहीं हैं।

स्पीकर की अर्जी पर भी आज सुनवाई
बागियों को स्पीकर के समक्ष पेश होने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कुछ घंटों बाद रमेश कुमार ने इस्तीफों की जांच के लिए ज्यादा मोहलत मांगी लेकिन कोर्ट ने नहीं दी। स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस्तीफों पर विचार में दिनभर का वक्त लगेगा, थो़ड़ा ज्यादा समय दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि आदेश दिया जा चुका है। अब उनकी याचिका पर शुक्रवार को बागियों की याचिका के साथ सुनवाई की जाएगी।

स्पीकर के फैसले पर टिकी नजर
अब सभी की नजरें बागियों के नए इस्तीफों पर स्पीकर रमेश कुमार के फैसले पर टिकी हैं। यदि 10 बागियों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं तो सत्तारू़ढ़ गठबंधन के विधायकों की संख्या विधानसभा अध्यक्ष को छो़ड़कर 106 हो जाएगी। फिलहाल भाजपा के पास 107 विधायकों का समर्थन है। कर्नाटक की 224 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 113 है। यदि 10 बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर हुए तो सदन की सदस्य संख्या घटकर 214 व बहुमत घटकर 108 रह जाएगा। भाजपा के पास अपने 105 विधायक व दो निर्दलीय का समर्थन है। यानी 107 का। छह अन्य बागी इस्तीफे दे चुके हैं, उनके भविष्य पर फैसले के बाद ही राज्य की सियासी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने को तैयार : कुमारस्वामी
सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन के 16 बागी विधायकों के इस्तीफे से संकट में घिरी कुमारस्वामी सरकार विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार है। गुरुवार को कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने विश्वास जताया कि उनकी सरकार बनी रहेगी।

कर्नाटक, गोवा मामले को लेकर कांग्रेस का वॉकआउट
उधर कांग्रेस ने कर्नाटक व गोवा में अपने विधायकों के दलबदल का मामला लोस में शून्यकाल में उठाना चाहा। स्पीकर ओम बिरला ने इजाजत नहीं दी तो हंगामा शुरू हो गया। कुछ देर बाद कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉक आउट कर दिया। संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन किया गया। इसमें सोनिया व राहुल गांधी भी शरीक हुए। यहां लोकतंत्र बचाओ के नारे गूंजे।

 

Posted By: Arun Kumar Singh