मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

बेंगलुर, एजेंसी। कर्नाटक में 14 महीने पुरानी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार की बिदाई करीब आ गई है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा गुरुवार को विधानसभा में पेश विश्वास प्रस्ताव पर जमकर ड्रामा हुआ। इस दौरान गठबंधन के 15 बागी विधायकों के अलावा कांग्रेस के दो और विधायक सदन से अनुपस्थित रहे।

साथ ही समर्थक दल बसपा का एक विधायक और दोनों निर्दलीय विधायक भी सदन में नहीं आए। लिहाजा कांग्रेस विधायक लगातार कार्यवाही में व्यवधान डालते रहे और सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित हो गई। उधर, भाजपा विधायकों ने सदन में ही रात भर धरना दिया। भाजपा विधायक तकिया और चादर लेकर पहुंचे और विधानसभा के अंदर कोई सोफे पर तो कोई जमीन पर जहां जगह मिली वहीं पर सो गया।

विरोध स्वरूप भाजपा विधायकों ने रातभर सदन में धरना देने का एलान कर किया। अब प्रस्ताव पर शुक्रवार को मतदान होने की संभावना है। राज्यपाल ने दोपहर 1.30 बजे के पूर्व मतदान कराने की सलाह दी है।

पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की घोषणा के बाद भाजपा विधायक सदन में डटे हैं। विश्वासमत परीक्षण नहीं होने के विरोध  में विधायक धरने पर बैठे हैं।

भाजप विधायक प्रभु चवण बेडशीट और तकिया लेकर विधानसभा पहुंचे। विधानसभा में पूरी रात के लिए धरने पर बैठे हैं भाजपा विधायक।

विधानसभा में धरने पर बैठे विधायक लाउंज में कर रहे हैं डिनर ।

भाजपा विधायक विधानसभा परिसर में सो रहे हैं।

धरने के दौरान एमएलए सदन में चादर बिछाकर सोए हुए भी दिखाई दिए। 

अन्य विधायक भी नींद लेते नजर आए। 

 एक पंक्ति का प्रस्ताव

लंबी जद्दोजहद के बाद गुरुवार को मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने विधानसभा में एक पंक्ति का विश्वास प्रस्ताव 'यह सदन 14 माह पुरानी मेरी सरकार में विश्वास प्रकट करता है' पेश किया। इसके बाद उन्होंने अपना भाषण शुरू किया और विपक्षी भाजपा को जमकर आड़े हाथों लिया। वहीं, भाजपा नेता येदियुरप्पा ने कहा कि कुमारस्वामी सरकार विश्वास खो चुकी है।

रेड्डी कांग्रेस खेमे में लौटे तो पाटिल बीमार हो गए

कांग्रेस को गुरुवार को आंशिक राहत उस वक्त मिली जब 15 बागियों के इस्तीफों से पहले ही पार्टी छोड़ चुके विधायक रामलिंगा रेड्डी उसके खेमे में लौट आए। वहीं पार्टी को तब झटका लगा जब उसके विधायक श्रीमंत पाटिल सदन में दिखाई नहीं दिए। बाद में पता चला कि सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें मुंबई में भर्ती कराया गया है। बसपा विधायक महेश भी सदन में नहीं पहुंचे। महेश ने बताया कि उन्हें बसपा प्रमुख मायावती से कोई निर्देश नहीं मिला, इसलिए वह नहीं गए। कुल 20 विधायक पहले दिन विधानसभा से गायब रहे।

 राज्यपाल की शरण में भाजपा

सत्तारुढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के इरादे भांपकर भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल वजुभाईवाला से मुलाकात की और मांग की कि वह स्पीकर रमेश कुमार को गुरवार को ही वोटिंग कराने का निर्देश दें। इसके बाद राज्यपाल ने स्पीकर को शुक्रवार दोपहर 1.30 बजे तक वोटिंग कराने की सलाह दी। देर शाम तक बहस चलने के बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दिन में ही भाजपा नेताओं ने आशंका प्रकट की थी कि कुमारस्वामी सरकार अंतिम समय की जोड़तोड़ जारी रखने के लिए बहस को लंबा खींच सकती है।

... इसलिए सरकार गिरना तय

1.चूंकि सत्तारुढ़ गठबंधन के 15 विधायक इस्तीफे दे चुके हैं और एक बीमार हो गए हैं इसलिए उनकी सदन में ताकत घटकर 101 रह गई है।

2. 224 सदस्यीय विधानसभा में मौजूद विधायकों की संख्या 16 कम होकर 208 रह जाएगी।

3. दो निर्दलीय विधायकों ने मंत्री पद छोड़कर भाजपा को समर्थन का एलान किया है।

4. ऐसे में वोटिंग होने पर 208 सदस्य यदि मतदान करेंगे तो बहुमत 105 पर मिलेगा।

5. चूंकि कांग्रेस-जेडीएस के 101 सदस्य रह गए हैं और भाजपा नीत विपक्ष के 105 और दो निर्दलीय विधायक मिलाकर 107 हो गए हैं, इसलिए विश्वास मत पर सरकार का गिरना तय है।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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