राज्‍य ब्‍यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा बुधवार को कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर दिए बयान से सियासी हलचल है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब वह खुद कांग्रेस में अपनी भूमिका को लेकर संघर्षरत हैं। मालूम हो कि सिंधिया ने पार्टी को आत्मचिंतन करने की जरूरत बताते हुए कहा था कि अगर कांग्रेस स्थिति में सुधार लाना चाहती है तो उसे मौजूदा हालात की समीक्षा करनी पड़ेगी और खुद के भीतर देखना पड़ेगा।

पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान वह मप्र में मुख्यमंत्री पद के सशक्त दावेदार थे, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के नाते कमलनाथ का दावा पार्टी आलाकमान को ज्यादा मजबूत लगा और उन्होंने सिंधिया की जगह कमलनाथ को नेता चुन लिया। तब से सिंधिया अपनी भूमिका की तलाश कर रहे हैं। सिंधिया को राहुल गांधी का नजदीकी माना जाता है।

लोकसभा चुनाव से पहले राहुल ने उन्हें आधे उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाकर उनके महत्व को रेखांकित किया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मेहनत भी की, लेकिन चुनाव परिणाम अपेक्षित नहीं आ पाए। वह खुद भी लोकसभा चुनाव हार गए। उनकी पराजय से उनके मुख्यमंत्री पद की दावेदारी पर ग्रहण लग गया। चुनाव बाद चर्चा थी कि उन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर प्रदेश में गुटीय संतुलन कायम किया जाएगा, लेकिन इसमें भी सफलता नहीं मिली। सिंधिया के बुधवार के बयान को मप्र कांग्रेस में उनकी भूमिका से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सिंधिया ने आत्मचिंतन वाला बयान कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के बयान पर पूछे गए सवाल पर दिया था। हालांकि उन्होंने खुर्शीद के उस बयान पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया कि पार्टी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि राहुल गांधी ने पद छोड़ दिया।

प्रदेश में अपना रहे यह दांव

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे सिंधिया अब राज्य में नया सियासी दांव अपना रहे हैं। विरोधी माने जाने वाले पार्टी के नेताओं के समर्थकों से वह नजदीकियां बढ़ाने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। किसी के घर पहुंचकर भोजन कर रहे हैं तो किसी से दिल्ली में मुलाकात कर रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने खुद को सभी गुटों में मान्य बनाने के लिए कमलनाथ सरकार के फैसलों में दूसरे गुटों के लोगों के समायोजन में अड़ंगा लगाने के बजाय सहमति देने की रणनीति पर अमल शुरू किया है।

बोले-किसानों का कर्ज पूर्ण रूप से माफ नहीं हुआ

सिंधिया ने गुरुवार को भिंड में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की संगोष्ठी में प्रदेश सरकार के कामकाज को लेकर तीखे तेवर दिखाए। कहा कि किसानों के सिर्फ 50 हजार रुपये तक के कर्ज माफ हुए हैं, जबकि हमने दो लाख तक का कर्ज माफ करने की बात कही थी। किसानों के दो लाख रुपये तक के कर्ज माफ होने चाहिए।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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