न्यूयार्क, प्रेट्र। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिया कि किसानों को दी जाने वाली सालाना 6,000 रुपये की न्यूनतम सहायता राशि बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार के संसाधन बढ़ते ही इसके उपाय किए जाएंगे। राज्य सरकारें इसे अपनी आय संबंधी योजनाओं से संचालित कर सकती हैं। जेटली ने एक विशेष भेंट में कहा कि प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना का यह पहला साल है।

12 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों को हर साल 6000 रुपये नकद देने की योजना के साथ ही खेती पर पड़ रहे दबाव को दूर करने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत एक घर, सस्ता भोजन, स्वास्थ्य की मुफ्त देखभाल और अस्पताल का खर्च भी दिया जा रहा है। उन्हें मुफ्त साफ-सफाई, बिजली, सड़क, गैस कनेक्शन, सस्ता कर्ज भी मुहैया कराया जा रहा है। अभी सरकार ने किसानों के बैंक खातों में 75,000 करोड़ रुपये सालाना देना शुरू किया है। उनके मुताबिक, आने वाले सालों में यह धनराशि बढ़ेगी। अगर राज्य सरकारें इस मद में धनराशि बढ़ाएं तो यह राशि तुरंत ही बढ़ेगी। कुछ राज्यों ने इस योजना में धनराशि को बढ़ाना शुरू भी कर दिया है। दूसरे राज्य भी देखा-देखी किसानों के लिए धनराशि बढ़ाएंगे।

'नकारात्मकता के नवाबों' पर साधा निशाना
जेटली ने कांग्रेस सहित समूचे विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह 'नकारात्मकता के नवाबों' से आह्वान करते हैं कि वह अपनी राज्य सरकारों में किसानों की आय योजना में धनराशि बढ़ा दें। उन्होंने कहा कि केंद्र की ज्यादातर योजनाएं 60:40 के अनुपात में हैं। इसलिए इसकी आलोचना करने के बजाय किसानों की इस योजना को भी इसी अनुपात में साझा किया जा सकता है। जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अंतरिम बजट में घोषित किसान योजना की धनराशि को महज 17 रुपये प्रतिदिन गिनाने पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता को थोड़ी परिपक्वता दिखानी चाहिए। वह राष्ट्रीय चुनाव लड़ रहे हैं, किसी कालेज यूनियन का नहीं।

यूपीए ने कर्ज माफी के नाम पर भी किया घोटाला
करीब 15 करोड़ किसानों के इस योजना से छूटने पर उन्होंने यूपीए शासनकाल की याद दिलाते हुए कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी.चिदंबरम ने 70 हजार करोड़ के कृषि कर्ज को माफ करने की घोषणा की थी। लेकिन वास्तव में इसके लिए केवल 52 हजार करोड़ रुपये ही जारी किए गए। उसमें भी कैग के मुताबिक इस धनराशि का बड़ा हिस्सा व्यापारियों और कारोबारियों को दे दिया गया। यह अपने आप में एक बड़ा घोटाला साबित हुआ।

रोजगार रहित विकास के आरोप से इन्कार
रोजगार रहित आर्थिक विकास के आरोपों को सिरे से खारिज किया। कहा कि पिछले पांच सालों में कोई बड़ा सामाजिक या राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन नहीं होने से साफ है कि सरकारी योजनाओं से रोजगार का सृजन हुआ है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद जीडीपी बढ़ने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नोटबंदी ने लोगों को अपना सारा कैश बैंकों में जमा करने के लिए बाध्य किया। स्थितियां बदलीं तो जीडीपी भी बढ़ा।

पीयूष गोयल ही बजट चर्चा का जवाब देंगे
अमेरिकी अस्पताल में इलाज करा रहे जेटली ने कहा कि शायद वह अंतरिम बजट पर चर्चा का जवाब देने के लिए भी भारत न लौट पाएं। मौजूदा हालत को देखते हुए लगता है कि पीयूष गोयल ही बजट चर्चा का जवाब देंगे। मोदी सरकार का छठा व आखिरी बजट कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने ही पेश किया था।

Edited By: Sanjeev Tiwari