अहमदाबाद, [शत्रुघ्न शर्मा]। गुजरात विधानसभा के लिए चुने गए 182 विधायकों में से 47 के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हैं, इनमें से 33 के खिलाफ हत्या व दुष्कर्म जैसे संगीन अपराध दर्ज हैं। युवाओं को लेकर दोनों ही दलों ने खूब प्रचार किया, लेकिन सदन में 25 से 40 वर्ष की उम्र के 21 विधायक ही पहुंचे हैं। विधानसभा के 141 विधायक करोडपति हैं, जिनमें 82 बीजेपी के तथा 54 कांग्रेस के हैं।

 

विधानसभा में 2012 में चुनकर आए विधायकों में से आपराधिक मामलों में लिप्त विधायकों की संख्या 57 थी जो अब घटकर 47 रह गई है, अपराध के आरोपों के संबंध में माननीयों का प्रतिशत 5 फीसदी घटा है। कांग्रेस के भावेश कटारा व भारतीय ट्राइबल पार्टी के महेश वसावा पर हत्या का मुकदमा है, जबकि 6 अन्य विधायकों पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। अपराध के आरोपी 47 विधायकों में 18 भाजपा के, 25 कांग्रेस के, भारतीय ट्राइबल पार्टी व एनसीपी के एक-एक तथा दो निर्दलीय शामिल हैं।

 

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विधानसभा में अधेड व बुजुर्ग विधायकों की संख्या अच्छी खासी है, 41 से 60 वर्ष की उम्र के 121 विधायक सदन में चुनकर पहुंचे हैं। जबिक 61 से 80 साल की उम्र के विधायकों की संख्या भी 40 के करीब है। 25 से 40 वर्ष की उम्र के विधायकों की संख्या महज 21 है। सबसे अधिक उम्र के विधायकों में कांग्रेस के सोमाभाई कोली पटेल 77 वर्ष लींबडी से, कांग्रेस के निरंजन पटेल 74 पेटलाद से तथा भाजपा के वल्लभ काकड़िया 73 ठक्करबापा नगर अहमदाबाद से हैं।

 

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म व गुजरात इलेक्शन वॉच की शोध से पता चलता है कि गुजरात विधानसभा में पहुंचे 182 विधायकों में से 141 करोडपति हैं, 2012 के चुनाव में चुनकर आए विधायकों में 134 विधायक करोडपति थे। करोडपति विधायकों में 82 भाजपा के तथा 54 कांग्रेस के हैं। सदन में चुनकर आए भाजपा के विधायकों की औसत संपत्ति करीब 11 करोड़ रुपये है, जबकि कांग्रेस के विधायकों की औसत संपत्ति 6 करोड रुपये है।

 

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सबसे अमीर विधायकों में भाजपा के सौरभ पटेल 123 करोड़ रुपये तथा धनजी पटेल 113 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं, जबकि कांग्रेस के जवाहर चावड़ा 103 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ अमीर विधायकों में तीसरे स्थान पर हैं। निर्दलीय विधायक जिगनेश मेवाणी 10 लाख 25 हजार की संपत्ति के साथ सबसे गरीब विधायक हैं, जबकि भाजपा की मालती माहेश्वरी करीब 12 लाख व अर्जुन चौहाण  साढ़े बारह लाख की संपत्ति के मालिक हैं।

 

इलेक्शन वॉच की संयोजक पंक्ति जोग बताती हैं कि गुजरात विधानसभा में 30 विधायक 12वीं पास, जबकि 43 विधायक स्नातक, 23 प्रोफेसर तथा 9 विधायक स्नातकोत्तर हैं। इनके अलावा 15 विधायक आठवीं पास, 7 विधायक 5वीं पास, 7 पढ़ना-लिखना जानते हैं, जबकि एक निरक्षर भी चुनकर आए हैं। 

 

गुजरात की पांच बड़ी सहकारी समिति व दूध डेयरियों से जुड़े नेता चुनाव हार गए, इनमें स्वास्थ्य राज्यमंत्री शंकरभाई चौधरी भी शामिल हैं। चौधरी बनास डेयरी के चेयरमेन हैं तथा वाव विधानसभा सीट पर उन्हें कांग्रेस की गेनीबेन ने परास्त किया है। बनास डेयरी के उपाध्यक्ष मावजी देसाई धानेरा सीट से हार गए, जबकि अमूल डेयरी के चेयरमैन रामसिंह परमार ठासरा सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव हार गए। परमार राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। इनके अलावा बरोडा डेयरी के चेयरमैन दिनेश पटेल व इसी डेयरी के बोर्ड सदस्य सतीश पटेल भी चुनाव हार गए। 

 

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गुजरात विधानसभा में हिन्दू विधायकों की संख्या 175 है, जबकि जैन व मुस्लिम 3-3 तथा एक विधायक दलित से ईसाई धर्म अंगीकार करने वाला है। जातिगत आंकड़ों की बात की जाए तो ओबीसी विधायक सबसे अधिक 62 की संख्या में हैं, जबकि लेउवा पाटीदार 26, कडवा पाटीदार 19, ब्राम्हण 8, जैन- 3, मुस्लिम- 3, राजपूत क्षत्रिय 15, अनुसूचित जाति 13, अनुसूचित जनजाति 27 व अन्य 6 विधायक हैं। ओबीसी में भी सबसे अधिक 16 ठाकोर, चौधरी 3, अहीर 6, कोली 5, कोली पटेल 14, अन्य 18 शामिल हैं।

 

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Posted By: Digpal Singh

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