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बंगाल में 'लिफाफा' चुनाव चिह्न पर घमासान, आईएसएफ ने खटखटाया आयोग का दरवाजा

Published: Sat, 19 Sep 2026 02:10 AM (IST)

तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' बनाने वाले ऋतब्रत बनर्जी गुट को चुनाव आयोग की ओर से 'लिफाफा' (खाम) प्रतीक चिह्न आवंटित किया गया है।

बंगाल में 'लिफाफा' चुनाव चिह्न पर घमासान (फाइल फोटो)

बंगाल में 'लिफाफा' चुनाव चिह्न पर घमासान (फाइल फोटो)

HighLights

  1. आइएसएफ का दावा-2021 से उसका है निशान, कानूनी लड़ाई की भी तैयारी

  2. नौशाद सिद्दीकी ने आयोग को कानूनी चुनौती देते हुए पत्र भेजा है

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल के राजनीतिक गलियारों में नया चुनाव चिह्न एक बड़े विवाद का कारण बन गया है। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' बनाने वाले ऋतब्रत बनर्जी गुट को चुनाव आयोग की ओर से 'लिफाफा' (खाम) प्रतीक चिह्न आवंटित किया गया है।

आयोग के इस फैसले के बाद इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) और नए दल के बीच तीखा टकराव शुरू हो गया है।

आईएसएफ के संस्थापक और एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव आयोग के इस कदम को अपनी पार्टी को कमजोर करने की राजनीतिक साजिश करार दिया है।

उन्होंने शुक्रवार को दस्तावेज पेश करते हुए स्पष्ट किया कि 2021 में पार्टी की स्थापना के बाद से ही आईएसएफ 'लिफाफा' चिह्न पर चुनाव लड़ रही है और मार्च 2026 में इसका नवीनीकरण (रिन्यू) भी कराया गया था।

नौशाद सिद्दीकी ने आयोग को कानूनी चुनौती देते हुए पत्र भेजा है और जरूरत पड़ने पर अदालत का रुख करने की बात कही है।

दूसरी ओर, ऋतब्रत गुट के प्रत्याशी एहतेशामुल हक ने नए चुनाव चिह्न का स्वागत करते हुए इसे अपने चुनाव प्रचार का मुख्य आधार बनाने का एलान किया है। एक ही चुनाव चिह्न दो अलग-अलग दलों के पास होने से आगामी चुनावों में मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा होना तय माना जा रहा है।