नई दिल्ली, राष्ट्रीय ब्यूरो। कर्नाटक उपचुनाव के नतीजों ने गठबंधन राजनीति पर विपक्षी दलों का उत्साह बढ़ा दिया है। यह साबित कर दिया कि महागठबंधन का आकार बढ़ा तो भाजपा को परेशानी होगी। पर भाजपा यह मानने को तैयार नहीं है। केंद्रीय दूरसंचार व रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा आश्वस्त हैं कि विपक्ष का सारा समीकरण उस वक्त ध्वस्त हो जाएगा जब बात प्रधानमंत्री की होगी। दैनिक जागरण के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख आशुतोष झा से हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

प्रश्न- भाजपा का कहना है कि इस बार पहले से भी बड़ी जीत होगी। कहीं यह आपका अतिविश्वास तो नहीं?

- हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि पहले से भी बड़ी जीत होगी। आप पूरे देश में घूमकर इसकी परख कर लीजिए। सामान्य लोगों की कल्पना में भारत सरकार की छवि तब आती है जब वह रेल में बैठे, कहीं सीमा पर लड़ाई हो, विमान में बैठे तो उन्हें लगता था कि यह भारत सरकार है। अभी आप गांव जाइए और पूछिए कि घर किसने दिया? जवाब आएगा, मोदी जी ने। शौचालय, गरीबों के घर में गैस, मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान आदि के बारे में पूछिए, वही जवाब आएगा। जनता को मोदी पर भरोसा है, हमें जनता पर।

प्रश्न- भाजपा मोदी की लोकप्रियता पर ही निर्भर या सांसदों व मंत्रालयों ने भी प्रदर्शन किया है? खुद आपके पास दो मंत्रालय हैं?

सारा काम मोदी जी के नेतृत्व में ही हो रहा है। लेकिन मैं संचार मंत्रालय की बात करता हूं। अब निवेशक आने लगे हैं। टावर दोगुने हो गए, आप्टिकल फाइबर तेजी से बिछा, निवेश छह गुना बढ़ गया। हम टेक्नोलॉजी डेवलपर्स के रूप में खड़े हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा सस्ता डेटा भारत में है। जो काम हुआ है उसका व्यापक असर हर क्षेत्र में दिखना शुरू हो गया है। आगे और मजबूती से दिखेगा जिसमें रोजगार भी शामिल है।

प्रश्न- इतना सब होने के बावजूद कॉल ड्राप से मुक्ति नहीं मिली?

इसके दो कारण हैं। यह भ्रम फैल गया कि टावर से स्वास्थ्य पर बुरा असर होता है। इस कारण कई जगहों पर विरोध होता है। हम जागरूकता फैला रहे हैं। सरकारी भवनों पर टावर लगाने की अनुमति भी दी गई है। दूसरे कारण तकनीक में सात-आठ महीने में बड़ा बदलाव दिखेगा।

प्रश्न- रेल चुनाव जिताऊ मंत्रालय माना जाता है। क्या 2019 में रेल भी भाजपा की जीत में भूमिका निभाएगा?

हां, रेल की बड़ी भूमिका होगी। सामान्य तौर पर उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश बहुत उपेक्षित रहा था। अब पूरा उत्तर प्रदेश विकसित हुआ और पूर्वी उत्तर प्रदेश केंद्र बिंदु बन गया है। आप गोरखपुर से इलाहाबाद जाइए तो देखिएगा कि एक भी ऐसा खंड नहीं जहां गेज लाइन रह गया हो, एक भी सेक्शन नहीं जिसका डबलिंग व इलेक्टि्राफिकेशन नहीं हो रहा।

प्रश्न- कर्नाटक में कांग्रेस-जदएस गठबंधन ने भाजपा को झटका दिया। उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन की तैयारी है। आपकी पार्टी कितनी सशंकित?

उपचुनाव के नतीजों से लोकसभा को मत जोडि़ए। कर्नाटक में सवाल यह नहीं था कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा। लोकसभा चुनाव में सवाल यही होगा तो महागठबंधन के पास उसका कोई जवाब नहीं होगा। लोगों को पता है अखिलेश व मायावती प्रधानमंत्री की दौड़ में नहीं हैं।

प्रश्न- पिछले चुनाव में भी प्रधानमंत्री उम्मीदवार मोदी थे। उस वक्त भी विपक्ष का संयुक्त वोट भाजपा से ज्यादा था?

मैं बेहिचक मानूंगा कि सपा-बसपा गठबंधन मजबूत राजनीतिक ताकत हैं। लेकिन यह नहीं मानूंगा कि वह मोदी जी को रोक सकेगा। कारण स्पष्ट है। जो विकास से दशकों से महरूम थे उनके लिए मोदी सरकार ने ही काम किया है। केंद्र में वह मोदी को ही देखना चाहते हैं।

प्रश्न- महागठबंधन की आहट से कई भाजपा नेता सीटें बदलने पर विचार कर रहे हैं। एक नाम आपका भी है?

मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि गाजीपुर का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं और अगर पार्टी लड़ाती है तो गाजीपुर के अलावा किसी और सीट से नहीं लड़ना चाहूंगा।

प्रश्न- विकास ही भाजपा का सबसे बड़ा एजेंडा है तो इलाहाबाद का नाम प्रयाग, फैजाबाद को अयोध्या करने के हिंदुत्व के एजेंडे पर काम क्यों?

इसे हिंदुत्व मत कहिए। इसे सांस्कृतिक पहचान कहिए।

प्रश्न- सांस्कृतिक विरासत की सबसे बड़ी पहचान तो राम मंदिर है। क्या उस पर भी काम होगा?

अयोध्या में राम मंदिर बने इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है। कैसे बने इसे लेकर अलग विचार हैं। संविधान के दायरे में जो भी संभव है वह होगा।

Posted By: Bhupendra Singh

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