जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। श्रीलंका, नेपाल, मालदीव, म्यांमार में चीन की भारी भरकम परियोजनाओं से सतर्क भारत बांग्लादेश में चीन के लिए स्थान नहीं छोड़ना चाह रहा है। पिछले महीने बांग्लादेश में तीन बड़ी रेल परियोजनाओं को लगाने का ऐलान करने के बाद भारत अब वहां कुछ बड़ी दूसरी अहम कनेक्टिविटी परियोजनाओं को शुरु करने की योजना को अंतिम रूप दे रहा है। इसमें चटगांव व मंगला में दो अहम बंदरगाहों का निर्माण, इन दोनों बंदरगाहों को जोड़ने वाली एक सड़क परियोजना और एक ऊर्जा परियोजना शामिल है। सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इन परियोजनाओं में भारत की मदद जापान करेगा।

बांग्लादेश में चीन के असर को काटने की आक्रामक रणनीति

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी की पिछले महीने की जापान यात्रा के दौरान बांग्लादेश में विकास परियोजनाओं को शुरु करने को लेकर उनकी पीएम शिंजो एबी से बात हुई है। यह सहमति भी बन गई है कि बांग्लादेश में दोनो देश मिल कर वहां के राष्ट्रीय महत्व की एक सड़क परियोजना लगाएंगे। इसमें सड़क का निर्माण भारत करेगा जबकि इस सड़क से जुड़े ब्रिजों के निर्माण का काम जापान करेगा।

चूंकि बांग्लादेश में बहुत सारी नदियां हैं इसलिए वहां की सड़क परियोजनाओं की लागत में पुल निर्माण का हिस्सा भी काफी अहम होता है। भारत और जापान मिल कर दक्षिण एशिया के दूसरे देशों और अफ्रीकी देशों में भी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को लगाने की मंशा रखते हैं। इनके बीच आपसी सहयोग का पहला उदाहरण जापान में पेश होगा।

भारत व जापान के बीच बांग्लादेश को और भी कई औद्योगिक परियोजनाओं का तोहफा देने पर बात हो रही है। इसमें ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल होंगी। भारत ने हाल ही में बांग्लादेश को पाइपलाइन के जरिए डीजल की आपूर्ति शुरु की है। जबकि पड़ोसी देश के लिए एक विशेष ऊर्जा परियोजना लगाने को लेकर भी दोनो देशों में बात हो रही है। इसमें जापान की भी मदद ली जा सकती है।

उक्त सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेश पहले ही इस बात का संकेत दे चुका है कि वह चीन की महत्वाकांक्षी बीआरआइ (बेल्ट एंड रोड इनिसिएटिव) को लेकर बहुत उत्साहित नहीं है। वर्ष 2016 में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ढाका को 21 अरब डॉलर की मदद देने का ऐलान किया था, लेकिन पीएम शेख हसीना की सरकार ने बाद में चीन से मिलने वाली मदद को लेकर खास तवज्जो नहीं दी।

हाल ही में बांग्लादेश ने 30 हजार करोड़ टका (बांग्लादेश की करेंसी) की परियोजना के लिए अंदरुनी स्त्रोतों का इस्तेमाल किया है। असलियत मे पिछले एक वर्ष के भीतर बांग्लादेश में चीन से ज्यादा भारत की मदद से चलाई जाने वाली परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। इसके पीछे वजह यह है कि भारत अपनी तरफ से कोई भी परियोजना नहीं थोपता। बल्कि बांग्लादेश सरकार की तरफ से जिन परियोजनाओं की मांग की जाती है उसे ही आगे बढ़ाया जाता है। 

Posted By: Bhupendra Singh