जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत पुलवामा में आतंकी हमले का सबूत पाकिस्तान को नहीं देगा। इसके बजाय हमले में पाकिस्तान का हाथ होने का सारा सुबूत मित्रवत देशों के सामने रखा जाएगा। मामले से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कई आतंकी हमलों के सुबूत पाकिस्तान को दिये गए हैं, लेकिन उनमें आरोपियों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। सुबूत और जांच की आड़ में पाकिस्तान सिर्फ समय निकालना चाहता है ताकि भारत की ओर से किसी भी तरह की कार्रवाई को टाला जा सके।

दरअसल गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को पाकिस्तान में भारत के राजदूत अजय बिसारिया और अमेरिका में भारत राजदूत हर्षव‌र्द्धन श्रृंगला से मुलाकात की और पुलवामा हमले के बाद राजनयिक हालात पर चर्चा की। चर्चा के बीच यह कर दिया गया कि इस बार भारत किसी भी तरह से पाकिस्तान की चाल में नहीं फंसेगा और दुनिया में उसे अलग-थलग करने और पुलवामा हमले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का विकल्प खुला रखेगा। ध्यान देने की बात है कि मंगलवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ठोस सबूत देने पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान को सबूत 2008 के मुंबई हमले के आरोपियों के भी दिये गए थे। उस समय अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत के भीतर गुस्से को देखते हुए पाकिस्तान ने जकी उर रहमान लखवी समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था और उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की थी। लेकिन 10 साल भी एक भी आरोपी को सजा नहीं मिली और सभी खुलेआम घूम रहे हैं।

यही स्थिति 2016 में पठानकोट हमले के समय भी हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भरोसे पर भारत ने पाकिस्तान को जैश ए मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर के खिलाफ सारे सबूत सौंपे थे।

पाकिस्तान ने इन सबूतों के आधार पर मसूर अजहर को नजरबंद कर बहावलपुर स्थित उसके ठिकानों को सील भी कर दिया था। यहीं नहीं, जांच में सहयोग के लिए भारत ने पाकिस्तान अधिकारियों को पठानकोट एयरबेस का दौरा करने भी इजाजत दे दी थी। लेकिन भारत के दौरे से लौटते ही पाकिस्तान अधिकारियों ने भारत के सबूतों को सिरे नकार दिया और मसूद अजहर और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ किसी भी कार्रवाई से इनकार कर दिया।

यही कारण है कि पुराने अनुभवों को देखते हुए भारत ने इस बार पाकिस्तान के झांसे में नहीं आने का फैसला किया है। इसी कारण पुलवामा हमले का कोई भी सुबूत पाकिस्तान को नहीं दिया जाएगा और न ही किसी तरह की जांच की उम्मीद की जाएगी।

इसके बजाय भारत पुलवामा हमले के सुबूतों के दुनिया के बड़े और मित्र देशों के साथ साझा करेगा, ताकि पाकिस्तान को अलग-थलग किया जा सके और किसी भी तरह कार्रवाई की स्थिति में दुनिया भर के देशों का समर्थन हासिल किया जा सके।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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