नई दिल्ली, एएनआइ। भारत ने कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग करने वाली ब्रिटेन की लेबर पार्टी के प्रस्ताव की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने लेबर पार्टी के इस कदम को वोट बैंक साधने की राजनीति बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लेबर पार्टी या उसके प्रतिनिधियों से बातचीत करने का कोई सवाल नहीं है। गौरतलब है कि ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी ने बुधवार को कश्मीर मुद्दे पर एक आपात प्रताव पारित किया। इस प्रस्ताव पार्टी नेता जेरेमी कॉर्बिन से क्षेत्र में प्रवेश के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक और वहां के लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग करने के लिए कहा गया है। 

ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक रुख के खिलाफ प्रस्ताव

लेबर पार्टी ने कश्मीर पर ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक रुख के विपरीत यह प्रस्ताव पेश किया है। ब्रिटिश सरकार का रुख रहा है कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है। बता दें पाकिस्तान लगातार कश्मीर परल झूठ बोलकर इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय पटल पर प्रमुखता पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो सका है। वहीं भारत ने साफ कह दिया है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना उसका आंतरिक मामला है, वहीं कश्मीर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है। 

आतंक के खिलाफ ठोस कदम उठाए पाकिस्तान

भारत ने बुधवार को दोहराया कि आतंकवाद से निपटने के पाकिस्तान के प्रयासों पर उसका रुख नहीं बदला है। पाकिस्तान अगर इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाता है तभी उससे बातचीत संभव है। रवीश कुमार ने एक विशेष मीडिया ब्रीफिंग में संवाददाताओं से ये बात कही। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि पाकिस्तान के साथ  बातचीत से भारत नहीं कतरा रहा है। उन्होंने कहा था कि भारत तभी पाकिस्तान के साथ बातचीत करेगा अगर पाकिस्तान आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस प्रयास करता है।

मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं

कुमार ने कश्मीर मुद्दे पर भारत के रुख को दोहराया कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मामला है और इसमें तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। हमारी स्थिति एकदम स्पष्ट है। बता दें कि अगस्त में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। भारत सरकार के इस फैसले से बौखलाकर पाकिस्तान ने अपने राजनयिक संबंधों को कम कर लिए और द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित कर दिया है। भारत ने यह सुनिश्चित किया है कि कश्मीर पर उसका निर्णय संवैधानिक और आंतरिक मामला है। भारत के इस रुख को दुनिया भर से समर्थन मिला है। 

Posted By: Tanisk

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