जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत एक साथ अमेरिका और रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने की शुरुआत में अपनी रूस की यात्रा के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए इनर्जी सेक्टर बहुत महत्वपूर्ण होगा।

पेट्रोलियम मंत्री 22 को रूस की यात्रा पर जाएंगे

भारत ने रूस के सुदूर पूर्व क्षेत्र के हाइड्रोकार्बन सेक्टर में निवेश करने की पेशकश की थी। अब इस बारे में बातचीत को आगे बढ़ाने पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान मंगलवार को रूस की यात्रा पर जा रहे हैं। रूस के बाद प्रधान जापान की भी यात्रा पर जाएंगे। प्रधान दोनों देशों से गैस आयात करने के मुद्दे पर खास तौर पर बात करेंगे। भारत रूस से गैस आयात बढ़ाना चाह रहा है जबकि जापान के साथ भी एलएनजी की खरीद को लेकर एक समझौता किया गया है।

भारत को भारी पैमाने पर करनी होगी प्राकृतिक गैस आयात

भारत की अर्थव्यवस्था में अभी गैस की हिस्सेदारी महज 65 फीसद है जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ा कर 15 फीसद करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत को भारी पैमाने पर प्राकृतिक गैस आयात करनी होगी।

यूएस-इंडिया स्ट्रेटिजिक पार्टनरशिप फोरम की बैठक

सोमवार को पेट्रोलियम मंत्री प्रधान ने यहां यूएस-इंडिया स्ट्रेटिजिक पार्टनरशिप फोरम की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दुनिया का ऊर्जा कारोबार बहुत हद तक भारत की जरुरत के हिसाब से तय होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने हमें गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य दिया है और इसका असर दुनिया के गैस बाजार पर दिखाई देगा। उन्होंने हाल ही भारतीय व अमेरिकी कंपनियों के बीच एलएनजी आयात करने और एलएनजी टर्मिनल स्थापित करने के लिए हुए समझौते का भी जिक्र किया।

अमेरिका भारत का एक बड़ा ऊर्जा साझेदार बन रहा है

प्रधान ने कहा कि अमेरिका भारत का एक बड़ा ऊर्जा साझेदार बन रहा है। वर्ष 2014 में भारत अमेरिका से कोई ऊर्जा उत्पाद आयात नहीं करता था जबकि पिछले वित्त वर्ष 7 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पादों का आयात किया गया। प्रधान ने अमेरिकी कंपनियों को भारत के बायो गैस सेक्टर में निवेश करने के लिए खास तौर पर आमंत्रित किया।

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