जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान कूटनीति को कितना अलग दृष्टिकोण से देखते हैं इसका एक बड़ा उदाहरण मंगलवार को दोनों देशों में देखने को मिला। एक तरफ भारत ने जहां नई दिल्ली स्थित दर्जनों राजनयिकों को करतारपुर गलियारे का धार्मिक पर्यटन कराया वहीं पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित कुछ विदेशी राजनयिकों को आतंकीगढ़ों का पर्यटन कराने की व्यवस्था की। करतारपुर कारीडोर को अगले महीने खोला जाने वाला है और वहां आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए सरकार ने जबरदस्त ढ़ाचागत सुविधा तैयार की है। दुनिया भर के 90 देशों के राजदूतों ने इसे देखा।

पाक ने राजदूतों को दिखाए आतंकियों के ध्वस्त ठिकाने

दूसरी तरफ पाकिस्तान सेना राजनयिकों को भारत पाक नियंत्रण रेखा पर आतंकियों के ध्वस्त ठिकाने को दिखाने ले गई। भारत ने दो दिन पहले ही एक बड़ी कार्रवाई करके जोरा और शाहकोट बार्डर पर चार आतंकी लांच पैड को नष्ट करने का दावा किया था।

भारत की कार्रवाई से पाक में जान माल को हुआ नुक़सान

पाकिस्तान का कहना है कि भारत की कार्रवाई में आम जान माल का नुक़सान हुआ है और उसे दिखाने के लिए ही विदेशी राजनयिकों को आमंत्रित किया गया था। भारतीय उप उच्चायुक्त को भी आमंत्रित किया गया था। वैसे पाकिस्तानी दावों के अनुसार ईरान, बेल्जियम समेत डेढ़ दर्जन देशों के राजनयिक वहां आने को तैयार हुए।

पाक नहीं स्वीकारता भारतीय सेना की कार्रवाई को

पाकिस्तान अभी भी यह स्वीकार नहीं कर रहा है कि भारतीय सेना की कार्रवाई में उसे भारी क्षति उठानी पड़ी है, लेकिन पाकिस्तान का यह पुराना रवैया है। वर्ष 2016 में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक और हाल में बालाकोट में की गई कार्रवाई को भी वह नहीं मानता है। बालाकोट में भारतीय वायु सेना की कार्रवाई को पहले पाकिस्तान सेना ने यह कहा कि सिर्फ कुछ पेड़ों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन बाद में कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसियों ने वहां दर्जनों आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि की। सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में वह बार-बार इनकार करता रहा, लेकिन भारतीय सेना ने सबूत तक पेश कर दिए कि कहां-कहां आतंकियों के अड्डे नष्ट किये गये हैं।

भारतीय सेना की कार्रवाई से पाकिस्तान को जबरदस्त नुकसान

दो दिन पहले भी भारतीय सेना की कार्रवाई से पाकिस्तान को जबरदस्त हानि उठानी पड़ी है। इससे ना सिर्फ पाकिस्तान सेना को नुकसान हुआ है बल्कि भारतीय सीमा में आतंकियों को भेजने की कोशिश पर भी पानी फिरा है। यही वजह है कि वह खीझ मिटाने के लिए विदेशी राजनयिकों को आतंकी पर्यटन कराने की कोशिश कर रहा है।

विदेशी राजनयिकों को नियंत्रण रेखा पर ले गया पाक

भारतीय एजेंसियों का कहना है कि मंगलवार को विदेशी राजनयिकों को नियंत्रण रेखा पर ले जा कर पाकिस्तान ने घरेलू स्तर पर खोई प्रतिष्ठा हासिल करने की कोशिश है।

पाक का दावा, वहां कोई भी आतंकी शिविर पैड नहीं था

पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैजल भी राजनयिकों के साथ थे। फैजल और पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने मंगलवार को एक के बाद एक कई फोटो सोशल मीडिया साइट्स पर डाले और यह दावा किया कि वहां कोई भी आतंकी शिविर पैड नहीं था।

24 अक्टूबर को भारत और पाक के बीच होगा समझौता

करतारपुर कारीडोर के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच अब गुरुवार यानी 24 अक्टूबर, 2019 को समझौता होगा। पहले यह समझौता 23 अक्टूबर, 2019 को होने वाला था, लेकिन कुछ वजहों से यह समझौता अब एक दिन बाद होगा। भारतीय तीर्थयात्रियों से 20 डॉलर की सेवा शुल्क लेने को लेकर अभी भी दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई है।

करतारपुर कारीडोर सेवा लाभ अर्जित के लिए नहीं होना चाहिए

विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस मुद्दे पर आगे भी बात होती रहेगी। भारत की तरफ से लगातार इस बात पर जोर दिया जाएगा कि यह धार्मिक उद्देश्य से सेवा शुरु की जा रही है और इसका उद्धेश्य लाभ अर्जित करना नहीं होना चाहिए।

Posted By: Bhupendra Singh

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