नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। भारत और चीन के बीच लद्दाख व सिक्किम के वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव काफी बढ़ चुका है, लेकिन अभी तक दोनो देशों के राजनीतिक नेताओं की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी की रविवार को बीजिंग में तकरीबन डेढ़ घंटे प्रेस कांफ्रेस चली और इसमें उन्होंने चीन से जुड़े हर कूटनीतिक सवाल को लिया लेकिन भारत के साथ सीमा विवाद या रिश्तों पर एक शब्द भी नहीं बोले। 

डोकलाम के बाद से हर सीमा विवाद को सैन्य स्तर पर ही सुलझाने का रिकॉर्ड 

माना जा रहा है कि दोनो देशों का शीर्ष राजनीतिक स्तर टिप्पणी करने से बच रहा है, ताकि सैन्य बलों के ही जरिए तनाव को खत्म किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक पिछले तीन-चार वर्षों में जब भी भारत व चीन के बीच तनाव हुआ है तो उस पर शीर्ष स्तर की तरफ से टिप्पणी करने से बचा गया है। वर्ष 2017 में जब डोकलाम विवाद हुआ था, तब भी भारत के प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री और चीन के राष्ट्रपति या विदेश मंत्री ने सीधे तौर पर टिप्पणी करने से परहेज किया था।

सैन्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से तनाव हुआ था खत्‍म 

यहां तक जब विवाद जारी था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी शिनफिंग के बीच मुलाकात हुई थी। बाद में दोनों तरफ की सैन्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से ही वहां फैसले तनाव को खत्म किया गया था। बाद में वुहान में मोदी और शिनफिंग की अनौपचारिक बातचीत के बाद सैन्य अधिकारियों को रणनीतिक निर्देश दिया गया था कि वे आपसी संचार को और बढ़ायें, ताकि कोई भी सैन्य तनाव हो तो उसका तुरंत समाधान निकाला जा सके। 

दोनों देशों के कूटनीतिक चैनल हैं सक्रिय 

सूत्रों के मुताबिक यह तंत्र अभी भी काम कर रहा है और संभवत: इस बार भी यही समाधान निकालेगा। सैन्य तंत्र के साथ ही दोनो देशों देशों के कूटनीतिक चैनल भी सक्रिय हैं। वैसे चीन व भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने अपने प्रवक्ताओं के जरिए एक दूसरे के खिलाफ तल्खी भरी बयानबाजी की है। लद्दाख क्षेत्र के पैंगोंग सो झील व गलवान घाटी के पास इस महीने की शुरुआत से ही अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। 

गलवान के क्षेत्र में भारत और चीन ने तैनात किए काफी अधिक सैनिक 

चीन ने गलवान के क्षेत्र में सामान्य से काफी ज्यादा सैनिकों को तैनात कर दिया है और उनकी तरफ से वहां कई टेंट लगाने व खुदाई करने का काम भी चल रहा है। भारत पहले से ही वहां ज्यादा सैनिकों को तैनात रखता था क्योंकि वहां की भौगोलिक परिस्थितियां चीन के पक्ष में है। ऐसे में भारत ने भी वहां ज्यादा सैनिकों को तैनात कर दिया है। शनिवार तक जो सूचनाएं उक्त क्षेत्र से आई है उसके मुताबिक भारत व चीन दोनों तरफ सैन्य गतिविधियां बढ़ती जा रही है। चीन के हिस्से में ज्यादा टेंट नजर आ रहे हैं तो भारत भी लगातार अपने सैनिकों की संख्या बढ़ा रहा है। कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि हो सकता है कि डोकलाम विवाद की तरह लद्दाख व सिक्किम क्षेत्र में जारी विवाद भी लंबा खींच जाए।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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