जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राजग के खिलाफ महागठबंधन की घोषणा के बीच भाजपा ने तैयारी कर ली है कि अगले छह सात महीने तक भाजपा कार्यकर्ता न सिर्फ सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएगी। बल्कि जाति पाति से परे राष्ट्रवाद कुछ ज्यादा बड़ा मुद्दा होगा। दिल्ली में शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के उदघाटन भाषण में ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 2014 से भी बड़ी जीत का भरोसा देते हुए कहा कि विपक्ष केवल भ्रम और झूठ फैलाकर अपना अस्तित्व बचाना चाहता है। लेकिन मोदी सरकार ने जिस तरह हर वर्ग के लिए काम किया है और हर क्षेत्र में देश का सिर उंचा किया है उसके बाद जनता भाजपा के साथ है।

शाह के नेतृत्व में ही अगला चुनाव
पिछले वर्षो में एक के बाद एक जीत दिला रहे अमित शाह के ही नेतृत्व में भी अगला चुनाव होगा। इस औपचारिकता को पूरी करने के लिए कार्यकारिणी में जनवरी 2019 में तय संगठन चुनाव टालने का निर्णय लिया गया। वैसे भी पहले चार राज्यों के चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह संभव नहीं है। जनवरी में शाह का तीन साल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पार्टी संविधान के अनुसार कोई भी तीन तीन साल के दो कार्यकाल तक अध्यक्ष रह सकता है।


अजेय भाजपा
इस फैसले के साथ ही भाजपा कार्यकारिणी में 'अजेय भाजपा' का नारा भी गूंजा और भविष्य की रणनीति भी तय हो गई। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के साथ साथ पश्चिम बंगाल पर अलग से चर्चा भी हुई। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में लगभग एक घंटे के भाषण में शाह ने कार्यकर्ताओं को हमलावर रहने का संदेश भी दे दिया। महागठबंधन का जिक्र भी उनके भाषण में आया।
केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनके भाषण की जानकारी देते हुए बताया कि शाह ने कहा कि कथित महागठबंधन में हर साथी से भाजपा का सामना हुआ है और उन्हें परास्त किया है। अब विपक्षी दल झूठ का सहारा लेकर भ्रम फैला रहे है। शाह ने निर्देश दिया कि हर कार्यकर्ता आंकड़ों के साथ मैदान में उतरें और जवाब दें। उन्होंने खासतौर पर पी चिदंबरम का नाम लिया और कहा कि हर कार्यकर्ता उन्हें चुनौती दे कि तथ्यों के साथ बहस के लिए आएं।
शाह ने कहा कि 19 राज्यो में भाजपा की सरकार और ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना जैसे कई राज्यों में पार्टी नंबर दो है।इसका अर्थ है कि वहां भी भाजपा ही आने वाली है। और इन तथ्यों के आधार पर यह भरोसा और पक्का हो गया है कि 2019 में पहले से भी बड़ी जीत मिलेगी। उन्होने आहान किया कि 'अगले छह सात महीने तक केवल कमल और भारत माता को याद रखें।'

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद
अपने भाषण में शाह ने एससी एसटी, ओबीसी, तीन तलाक जैसे कई मुद्दों केजरिए उक्त समाज के लिए किए गए काम की चर्चा तो की। लेकिन बड़ा मुद्दा राष्ट्रवाद और हिंदुत्व होगा। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने फिर से दोहराया कि अगर पड़ोसी देशों से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, इसाई शरणार्थी के रूप में आते हैं तो हमें उन्हें शरण देना चाहिए। ध्यान रहे कि पासपोर्ट कानून में भी कुछ बदलाव करते हुए इसकी व्यवस्था की गई है कि ऐसे लोगों को लंबी अवधि के लिए वीजा दिया जाए। शाह ने एनआरसी का भी जिक्र किया औैर कहा कि यह भाजपा के लिए पुराना मुद्दा है। इसे और मुस्तैदी से पूरा किया जाएगा। शाह ने शहरी नक्सली का भी जिक्र किया और कहा कि भाजपा 'मेकिंग इंडिया' के काम कर रही है और कांग्रेस 'ब्रेकिंग इंडिया' के लिए।

पार्टी की नेतृत्व करते मोदी
एक तरफ जहां अब तक विपक्ष यह बताने में अक्षम है कि आखिर मोदी के मुकाबले उनका चेहरा कौन होगा। वहीं शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि वह कहते हैं कि वह पार्टी का अनुसरण करते हैं। जबकि मोदी भाजपा का नेतृत्व करते है। गौरतलब है कि 2014 के चुनाव में भी यह एक मुद्दा था। प्रधानमंत्री के रूप में एक ऐसे सशक्त नेता के अभाव को भाजपा ने जोर शोर से उठाया था जो नेतृत्व कर सके।

छाई रही अटल की याद
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की छाया बनी रही। पोस्टरों में 'सदैव अटल' और भाषण में अटल की उपलब्धियों का जिक्र हुआ। बैठक की शुरूआत में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और शाह ने कहा कि भाजपा की स्थापना के बाद से अब तक पहली बार कोई कार्यकारिणी संसार में अटल की गैर मौजदगी में हो रही है। उन्होंने अटल केकाल में उठाए गए कई ऐतिहासिक कदमों का भी जिक्र किया। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समापन भाषण होगा। माना जा रहा है कि उनके भाषण में भी विपक्ष पर हमला होगा।

 

Posted By: Arun Kumar Singh