भोपाल, एएनआइ। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर कहा कि कांग्रेस सरकार अल्पमत में है, आप सरकार को निर्देश दें कि वह फ्लोर टेस्ट कराए। इसके बाद से राजभवन विधि विशेषज्ञों को बुलाकर कानूनी संभावनाओं को टटोल रहा है। इधर, कानून के जानकार कहते हैं कि जब राज्यपाल को संदेह हो जाए कि सरकार के पास बहुमत नहीं है तो वह फ्लोर टेस्ट का निर्देश दे सकता है। वह भी तब, जबकि राज्यपाल इस बात से संतुष्ट हो जाएं कि वाकई संवैधानिक संकट की स्थिति बन गई है, सरकार बहुमत खो चुकी है। भाजपा नेताओं ने फ्लोर टेस्ट की वीडियोग्राफी के लिए भी राज्यपाल से अनुरोध किया है। इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान के अलावा के गोपाल भार्गव, नरोत्‍तम  मिश्रा, भूपेंद्र सिंह मौजूद रहे।  

फ्लोर टेस्ट का निर्देश देना राज्यपाल का संवैधानिक विशेषाधिकार

कानून के जानकार कहते हैं कि जब राज्यपाल को संदेह हो जाए कि सरकार के पास बहुमत नहीं है तो वह फ्लोर टेस्ट का निर्देश दे सकता है। वह भी तब, जबकि राज्यपाल इससे संतुष्ट हो जाएं कि वाकई संवैधानिक संकट की स्थिति बन गई है, सरकार बहुमत खो चुकी है।   

विधानसभा अध्‍यक्ष को 22 विधायकों ने इस्‍तीफा सौंपा

अब तक 22 विधायकों ने मध्‍य प्रदेश के विधानसभा अध्‍यक्ष को इस्‍तीफा सौंपा था, लेकिन उसे स्‍वीकार नहीं किया गया है। एमपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा के खेमे में जाने और 22 विधायकों के इस्‍तीफे के बाद अब कमलनाथ सरकार के अस्तित्‍व पर संकट मंडरा रहा है। प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने इस्तीफा देने वाले सभी विधायकों को नोटिस जारी कर पेश होने के लिए कहा है। बताया जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष ने बेंगलुरु में मौजूद कांग्रेस के विधायकों को नोटिस दिए हैं। विधायकों को 15 तारीख तक जवाब देना है।

कांग्रेस ने कहा, ऐसे में नहीं हो सकता है फ्लोर टेस्‍ट

वहीं, कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि 19 कांग्रेस के विधायक भाजपा के कब्जे में है। ऐसे में फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता, क्योंकि 19 विधायकों द्वारा प्रस्तुत इस्तीफे स्वीकार नहीं किए गए हैं। उन्हें शारीरिक रूप से अध्यक्ष के सामने आना चाहिए। उन्‍होंने आगे कहा कि कांग्रेस के विधायकों को भारतीय जनता पार्टी ने कर्नाटक पुलिस के द्वारा बंधक बनाया हुआ है। हमारे मंत्रियों जीतू पटवारी और लाखन सिंह के साथ बदतमीजी की जा रही है।'

फ्लोर टेस्ट पर किसकी - क्या राय

संविधान और सुप्रीम कोर्ट के तहत राज्यपाल सर्वोपरि

एमपी के पूर्व महाधिवक्ता और सीनियर एडवोकेट रविनंदन सिंह का कहना है कि भाजपा कह रही है कि कमलनाथ सरकार के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है, अब उसके पास बहुमत नहीं है। वहीं कांग्रेस कह रही है कि उसके विधायकों को बंधक बनाया गया है। ऐसे हालात में और साक्ष्य के अभाव में राज्यपाल को संवैधानिक अधिकार है कि वह सरकार को फ्लोर टेस्ट करवाने का निर्देश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यही कहा है कि संवैधानिक संकट की स्थिति में फ्लोर टेस्ट का निर्देश देना राज्यपाल का विशेषषाधिकार है। कर्नाटक और उत्तरप्रदेश मामले का निर्णय इसका उदाहरण है।

मप्र शासन में विधि विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव पीपी तिवारी का कहना है कि अगर राज्यपाल को जरा भी शंका है कि सरकार के पास बहुमत है या नहीं तो वे एक निर्धारित समयसीमा के भीतर विश्वासमत हासिल करने का निर्देश दे सकते हैं, उसे मानने के लिए सरकार बाध्य है।

लोकसभा सचिवालय के पूर्व महासचिव अनूप मिश्रा का कहना है कि किसी भी सरकार के पास बहुमत होने या न होने का फैसला सदन में ही हो सकता है। राज्यपाल को यदि संदेह है तो वे सरकार को विश्वास मत हासिल करने की सलाह दे सकते हैं।

राज्यपाल के पास विशेषाधिकार : कौरव

प्रदेश के पूर्व महाधिवक्ता पुरषषेन्द्र कौरव का कहना है कि ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास विशेषषाधिकार हैं। राज्यपाल को यदि सरकार के बहुमत को लेकर संदेह है तो वह सरकार को बहुमत सिद्ध करने का आदेश दे सकते हैं।

इनकी राय विपरीत

अभिभाषषण के बाद ही सदन की कार्रवाई वैध

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि संवैधानिक प्रावधान यह है कि विधानसभा का सत्र राज्यपाल के अभिभाषषण से ही शुरू हो। उसके बाद सदन की किसी भी कार्रवाई को वैधता मिलती है। अभिभाषण से ही सत्र शुरू माना जाता है, उसके बाद ही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव अथवा अन्य कोई कार्रवाई मान्य होगी।

मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवान देव ईसराणी का कहना है कि हाई कोर्ट के निर्णय में भी यही बात कही गई बिना अभिभाषषण के विधानसभा की कार्रवाई अवैधानिक मानी जाएगी। हाईकोर्ट का निर्णय भी यही कहता है।

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Posted By: Arun Kumar Singh

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