नई दिल्ली, प्रेट्र। सरकार को नई शिक्षा नीति (एनईपी) पर दो लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं। इन सुझावों को देखा जा रहा है और नई समग्र नीति लाने के लिए राज्यों के साथ गहन विचार- विमर्श किया जा रहा है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति विस्तृत परामर्श के बाद तैयार होने वाली दुनिया की पहली नीति होगी। केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

मसौदे में सभी सुझाव शामिल

संसद के ऊपरी सदन में एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए निशंक ने कहा, 'के कस्तूरीरंगन द्वारा तैयार किए गए एनईपी मसौदे को लोगों की पहुंच में रखा गया है। मसौदे पर दो लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं। हर सुझाव पर गंभीरता से गौर किया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि सांसद और विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के अलावा सचिवों और विशेषज्ञों से संपर्क किया जा रहा है। मसौदे में सभी सुझाव शामिल हैं। एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि मातृभाषा ही प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनी रहेगी।

लाभ-हानि रहित है 10वीं, 12वीं परीक्षा शुल्क में वृद्धि

एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में निशंक ने कहा कि सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क में वृद्धि लाभ-हानि रहित आधार पर की है।

यूजीसी, एआइसीटीई के विलय पर अभी फैसला नहीं

एक सवाल के जवाब में निशंक ने बताया बताया कि यूजीसी और एआइसीटीई के विलय पर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। पिछले साल एचआरडी मंत्री ने ट्वीट में कहा था कि भारतीय उच्च शिक्षा आयोग एकल नियामक होगा और यह यूजीसी और एआइसीटीई की जगह लेगा। विस्तृत परामर्श के बाद विधेयक तैयार किया गया है और अक्टूबर में मंत्रिमंडल के सामने लाया जाएगा।

 

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