नई दिल्ली, प्रेट्र। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आजादी के बाद देश का सबसे सफल प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि उन्होंने गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के क्षेत्र में देश को अलग ही मुकाम पर पहुंचा दिया है। 'डिलीवरिंग डेमोक्रेसी : सरकार के प्रमुख के रूप में नरेन्द्र मोदी के दो दशक' पर राष्ट्रीय गोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, 'अशिक्षित लोगों के साथ कोई देश विकास नहीं कर सकता और उन्हें पढ़ाने का दायित्व शासन का है। जो अपने संवैधानिक अधिकारों के बारे में नहीं जानता, वह देश के विकास में पूर्ण रूप से सहभागिता नहीं कर सकता।' उन्होंने कहा कि भाजपा का नरेन्द्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाना दुर्लभ घटना थी क्योंकि 2001 में उनके पास प्रशासन चलाने का कोई वास्तविक अनुभव नहीं था। उस समय कठिन हालात का सामना करने के बावजूद उन्होंने खुद को सफल प्रशासक साबित किया।

उन्हें पढ़ाना शासन का दायित्व

कच्छ में आए भूकंप के बाद राज्य बेहद दबाव के दौर से गुजर रहा था। उन्होंने चीजों को बदलने की कोशिश की और विकास व पारदर्शिता के लिए काफी काम किया। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे तो राज्य में प्राथमिक स्कूली शिक्षा में पंजीकरण 67 प्रतिशत और ड्राप आउट 37 प्रतिशत था। उन्होंने लिंगानुपात और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम शुरू किया। इसकी वजह से पंजीकरण सौ प्रतिशत तक हो गया और उन्होंने ड्राप आउट प्रतिशत करीब-करीब शून्य तक घटाने के लिए भी कदम उठाए।

2014 से पहले रामराज की की परिकल्पना हो चुकी थी ध्वस्त

शाह ने कहा कि 1960 से 2014 के बीच लोगों के मन में एक बड़ा सवाल आ गया था कि क्या बहुदलीय लोकतांत्रिक प्रणाली सफल हो सकती है, तब तक रामराज्य या कल्याण राज्य की परिकल्पना ध्वस्त हो चुकी थी। 2014 में बड़े धैर्य के साथ लोगों ने निर्णय लिया और पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता दी। पूर्व की कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार की आलोचना करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उनके शासनकाल में नीतिगत पंगुता की स्थिति थी।

संप्रग शासनकाल में थी नीतिगत पंगुता की स्थिति, हर मंत्री खुद को समझता था प्रधानमंत्री

उन्होंने कहा, '2014 के चुनावों के समय हमारी सरकार कैसी थी? हमारे पास ऐसी सरकार थी जिसमें कैबिनेट मंत्री प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री नहीं मानते थे, हर कोई खुद को प्रधानमंत्री समझता था। देश की सुरक्षा का कोई ठिकाना नहीं रहा था, विदेश में देश का सम्मान शायद सबसे निचले स्तर पर था, 12 लाख करोड़ रुपये के घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार था। आंतरिक सुरक्षा के ढेर सारे सवाल खड़े हो गए थे। ऐसा लगता था कि कभी भी हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। ऐसे समय में भाजपा ने गुजरात के मुख्यमंत्री को अपने प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर उतारने का फैसला किया।

सिर्फ प्रशासनिक या आर्थिक सुधार ही देश की समस्याएं नहीं

गृह मंत्री ने कहा कि 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो लोगों को लगने लगा कि अब चीजें सुधरेंगी, व्यवस्था में सुधार आएगा। देश की समस्याएं सिर्फ प्रशासनिक या आर्थिक सुधार की नहीं हैं, बल्कि देश के गौरव को संभालना है, देश की संस्कृति को आगे बढ़ाना है, देश की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। इसके लिए अलग प्रकार के दृष्टिकोण की जरूरत होती है, वह एक जननेता में ही होता है जो जमीन से ऊपर उठा है।

खुद को प्रधान सेवक ही मानते हैं मोदी

गृह मंत्री ने कहा, 'संविधान ने गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊपर उठाना, देश को सुरक्षित, समृद्ध, शिक्षित और संस्कारित बनाना, संस्कृति को आगे बढ़ाना और दुनियाभर में देश के गौरव को शिखर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। जब यह सब एकत्र होता है तो एक सफल शासक बनता है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी खुद को प्रधान सेवक मानते हैं, लेकिन मैं कह सकता हूं कि आजादी के बाद देश में अगर कोई सफलतम प्रधानमंत्री है तो वह नरेन्द्र मोदी हैं।

यूपी चुनाव में खतरे के बावजूद की थी नोटबंदी की घोषणा

पिछले सात साल में मोदी सरकार द्वारा लिए गए फैसलों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि 2016 में जब नोटबंदी की घोषणा की गई थी तो वह जानते थे कि इसमें खतरा है क्योंकि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने वाले थे, लेकिन लोग मोदी के साथ खड़े हो गए और फैसले का समर्थन किया। लोगों ने माना कि इसकी घोषणा काले धन पर लगाम लगाने के लिए की गई थी और मोदी का कोई और उद्देश्य नहीं था। तत्काल तीन तलाक के खिलाफ कानून, वन रैंक वन पेंशन, चीफ आफ डिफेंस स्टाफ के पद का सृजन, ये सभी कठिन फैसले थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को विदेश नीति से अलग किया

शाह ने कहा आतंकरोधी सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के बाद पूरी दुनिया को यह संदेश गया कि कोई भी भारत की सीमा के साथ छेड़खानी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, 'इसे आप नरेन्द्र मोदी के बोल्ड फैसले के तौर पर देख सकते हैं या आप इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के फैसले के रूप में देख सकते हैं, यह एक महत्वपूर्ण कदम है।'

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा की कोई समुचित नीति नहीं थी और यह हमेशा विदेश नीति की साये में रहती थी। मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को विदेश नीति से पूरी स्पष्टता से अलग किया है। हमने साफ कर दिया है कि हम दोस्ती चाहते हैं, लेकिन अपनी संप्रभुता पर किसी तरह का अतिक्रमण स्वीकार नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय पासपोर्ट की अहमियत बढ़ाई है जो देश का सम्मान है।

राम जन्मभूमि फैसले के बाद नहीं फैला कोई असंतोष

अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के संबंध में गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत में पूरी तरह एकीकरण हो चुका है और देश में किसी भी स्थान पर कोई दंगा नहीं हुआ और राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कोई असंतोष पैदा नहीं हुआ।

Edited By: Arun Kumar Singh