जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राजनीतिक रूप से गरमा रहे एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के खिलाफ सरकार पुनर्विचार याचिका लगाएगी। सरकार ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कानूनविदों से चर्चा के बाद इस बात का फैसला ले लिया है। शुक्रवार को इसका औपचारिक ऐलान होगा। संभव हुआ तो उसी दिन सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दे दी जाएगी।

दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर सवाल उठाते हुए तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगी दी थी। विपक्ष ने इसे हथियार बनाते हुए भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया था। जाहिर है कि भाजपा और केंद्र सरकार सतर्क हो गई थी क्योंकि पिछले दिनों में दलितों और आदिवासियों के बीच भाजपा ने बड़ी पैठ बनाई है। विपक्ष इसी में सेंध लगाना चाहता है और इसीलिए लगे हाथों संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान याद दिलाते हुए कहा जाने लगा था कि पहले भी सरकार की ओर से आरक्षण को खत्म करने की कवायद हुई थी।

अमित शाह, जेटली, रविशंकर और गहलोत के बीच हुई चर्चा

जाहिर तौर पर सरकार विपक्ष को इसका श्रेय नहीं देना चाहती है लिहाजा तत्काल कदम उठाने का मन बन गया है। बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा की। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने गुरूवार को दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि 'उनकी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा सरकार के वरिष्ठ मंत्री और कानूनविद अरुण जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से बातचीत हुई है। उन्हें फैसले की प्रति भी दी है। साथ ही विभाग की मंशा से अवगत कराया है। प्राथमिक तौर पर सभी पुनर्विचार याचिका लगाने के पक्ष में है। शुक्रवार को फिर इस मसले पर चर्चा की होगी। संभव हुआ तो शुक्रवार को ही पुनर्विचार की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी।'

सूत्रों के मुताबकि विभागीय अधिकारियों ने इसकी तैयारी शुरु कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के सामने नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के वह सभी आंकड़े रखे जाएंगे, जिसमें सामान्य वर्ग के खिलाफ दर्ज होने वाले मामले में भी बड़े पैमाने पर मामले ऐसे होते है, जिसमें आरोपी दोषमुक्त हो जाता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में अपने फैसले में जो आधार बनाया है, वह कोई ठोस आधार नहीं है। इससे एससी-एसटी वर्ग के खिलाफ उत्पीड़न और शोषण की घटनाएं बढ़ेगी।

पासवान ने भी की पुनर्विचार की मांग

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार से पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यूं तो मोदी सरकार के काल मे ही 2016 में इसे और मजबूत बनाया गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने स्थिति बदल दी है। उन्होंने कहा कि सरकार से समय रहते इस मामले मे उचित कदम उठाने की मांग की।

 

Posted By: Kishor Joshi

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