नई दिल्ली, आइएएनएस। केंद्र सरकार शत्रु संपत्ति की अचल संपत्तियों जैसे जमीन और इमारतों को इस वित्तीय वर्ष में बेचकर राजस्व हासिल करेगी। इसके अलावा सरकार केंद्रीय लोक उपक्रमों (सीपीएसई) की अनुपयोगी संपत्तियों को भी बेचकर उसमें अपना हिस्सा लेगी। इससे विनिवेश का राजस्व भी बढ़ेगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी राजग सरकार ने 1800 करोड़ रुपये में 'शत्रु संपत्ति' बेची थी। शत्रु संपत्ति वह होती है जिसे कोई अपराधी या देशद्रोही छोड़कर विदेश भाग जाएं। बटवारे के समय पाकिस्तान या बांग्लादेश जाकर बसने वाले लोगों की संपत्तियां भी शत्रु संपत्ति के दायरे में आती हैं।

नए कानून के तहत ऐसी संपत्तियों को अब सरकार अपने कब्जे में ले लेती है और उसे जरूरत के हिसाब से बेच या उपयोग भी कर सकती है। अधिकारी ने बताया कि ऐसी शत्रु संपत्तियों को बेचा जाएगा जिनके दस्तावेज दुरुस्त होंगे।

डीआइपीएएस के सचिव अतनु चक्रबर्ती ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020 के लिए सरकार ने अपना विनिवेश का लक्ष्य बढ़ा लिया है। पहले यह लक्ष्य 90 हजार करोड़ रुपये था जो अब 1,05,000 करोड़ रुपये हो गया है। इसलिए विनिवेश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सभी उपाय किए जाएंगे। शत्रु की अचल संपत्ति बेचने के लक्ष्य के बारे में पूछे जाने पर चक्रबर्ती ने कहा कि हम ऐसे लक्ष्यों को निर्धारित नहीं करते हैं।

कानूनी मसले वाली इन प्रक्रियाओं को पूरा करने में समय लगेगा। इन संपत्तियों के कांट्रैक्ट, समझौते और टाइटल पर भी काम होगा। एयर इंडिया जैसे बड़े और छोटे लेनदेन के लिए भी बहुत काम करना होगा।

Posted By: Nitin Arora