नई दिल्ली, प्रेट्र। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के विभिन्न पहलुओं से संबंधित जस्टिस जेएस वर्मा समिति की रिपोर्ट लागू करने के अनुरोध वाली एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से जवाब देने को कहा। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और सूर्यकांत की पीठ ने इसी मुद्दे पर एक अन्य याचिका को इसके साथ संलग्न करते हुए गृह, मानव संसाधन विकास और कानून मंत्रालयों तथा अन्य को नोटिस जारी किया। यह जनहित याचिका कानून के एक छात्र बी श्रीनिवास गौड़ ने दायर की है।

वर्मा समिति ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के रोकने के संबंध में दिए थे सुझाव

वर्मा समिति ने 23 जनवरी, 2013 को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री को रिपोर्ट सौंपी थी। राष्ट्रीय राजधानी में 16 दिसंबर, 2012 की रात पैरामेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या के बाद वर्मा समिति का गठन किया गया था, ताकि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के संबंध में उपाय सुझाए जा सकें।

वर्मा समिति की अधिकतर सिफारिशों को सात साल बाद भी लागू नहीं किया गया

वकील रामास्वामी बालाजी के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपे जाने के सात साल बाद भी उसकी अधिकतर सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है। इससे देश में, खासतौर से यौन उत्पीड़न के पीडि़तों और उनके अभिभावकों में बेचैनी है।

दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि, दोषियों को दंडित करने में देरी से त्वरित न्याय की अवधारणा बढ़ रही

देशभर में दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि और दोषियों को दंडित करने में देरी से त्वरित न्याय की अवधारणा बढ़ रही है। इसके परिणामस्वरूप हैदराबाद में पुलिस ने दुष्कर्म के चार आरोपितों की मुठभेड़ के नाम पर कथित रूप से हत्या कर दी। याचिका में कहा गया है कि वर्मा समिति की कुछ सिफारिशों को छोड़कर ज्यादातर को लागू नहीं किया गया है।

Posted By: Bhupendra Singh

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