नई दिल्‍ली (एएनआई)। राजनीतिक गलियारों में रविवार का दिन बेहद खास हो गया है। खास होने की कुछ बड़ी वजह भी है। इसकी पहली वजह है कि सोमवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है। इसको देखते हुए सरकार समेत सभी विपक्षी पार्टियां अपनी रणनीति बनाने के लिए आज अलग-अलग बैठक करने वाली हैं। संसद के शीतकालीन सत्र को सुचारू रूप से चलाने के मकसद से सरकार ने भी आज सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक की अध्‍यक्षता पीएम नरेंद्र मोदी ने की है। 

इसके पीछे सरकार का मकसद संसद के पटल पर पेश होन वाले विधेयकों को पारित करवाने में विपक्ष की अड़चनों को कम करना है। इस बैठक में कांग्रेस की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे, अधीर आर चौधरी, आनंद शर्मा, टीएमसी से सुदीप बनर्जी और डैरेक ओ ब्रायन, डीएमके के टीआर बालू और टी सिवा, एनसीपी के शरद पवार शामिल हुए हैं। टीएमसी के सुदीप बनर्जी ने इससे पहले कहा कि टीएमसी कांग्रेस द्वारा बुलाई गई विपक्षी पार्टियों की बैठक में हिस्‍सा नहीं लेगी। 

इस सर्वदलीय बैठक के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि इस बैठक में 31 पार्टियां शामिल हुई थीं। विभिन्‍न राजनीतिक पार्टियों के करीब 42 नेताओं के बीच में शीतकालीन सत्र को लेकर सौहार्दपूर्ण वातावरण में बातचीत हुई, जो काफी अच्‍छी रही। उन्‍होंने ये भी कहा कि सरकार हर उन मुद्दों पर बिना किसी समस्‍या के चर्चा करेगी जिसको सभापति मंजूरी देंगे।

इस बैठक में शामिल कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्‍हें उम्‍मीद थी कि इसमें पीएम मोदी भी शामिल होंगे, लेकिन कुछ कारणों के चलते वो इसमें हिस्‍सा नहीं ले सके। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने की बात कही है लेकिन पीएम का कहना है कि वो किसानों को समझ नहीं सके। इसका मतलब है कि सरकार इन कानूनों को भविष्‍य में वापस ला सकती है। उन्‍होंने इस बात की भी मांग की है कि कोविड-19 महामारी के चलते जान गंवाले वाले पीडि़तों के परिजनों को सरकार चार-चार लाख का मुआवजा दे। इसी तरह का मुआवजा उन किसानों को भी दिया जाना चाहिए जिनकी जान इस आंदोलन में गई। 

बैठक के बाद आप नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने दूसरी पार्टी के नेताओं को बोलने ही नहीं दिया। उनके मुताबिक इस बैठक में उन्‍होंने एमएसपी पर कानून बनाने और बीएसएफ का बढ़ा दायरा वापस लेने का मुद्दा उठाया था। लेकिन सर्वदलीय बैठक में बोलने ही नहीं दिया गया।  

आपको बता दें कि सरकार शीताकालीन सत्र के पहले ही दिन तीन कृषि कानूनों को रद करने के लिए बिल लाने वाली है। इसके लिए सरकार ने अपने सांसदों को व्हिप भी जारी किया है। कृषि कानूनों पर सरकार को बड़ी फजीहत उठानी पड़ी है। किसानों ने इस मुद्दे पर एक साल से आंदोलन छेड़ा हुआ है। किसान पहले शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन संसद कूच करना चाहते थे, लेकिन कृषि मंत्री की तरफ से आए बयान के बाद फिलहाल किसानों ने इसको टाल दिया है। हालांकि किसानों ने ये भी साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन एमएसपी पर कानून बनने तक जारी रहेगा। 

Edited By: Kamal Verma