पणजी, आइएएनएस। एमजीपी के टूटे विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मामले पर मंगलवार को सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई कर रहे बांबे हाई कोर्ट की पणजी खंडपीठ ने गंभीर टिप्पणी की है। जस्टिस आरडी धानुका और पृथ्वीराज चव्हाण की पीठ ने कहा कि देर रात इस तरह का विलय कुछ ऐसा था, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था। पीठ ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष से विलय के बारे में विस्तृत जवाब मांगा है।

विलय की वैधता पर सवाल उठाने वाले स्थानीय राजनीतिज्ञ सदानंद वेंगरकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस धानुका ने कहा कि उन्होंने अगले दिन समाचार पत्रों में विलय के बारे में पढ़ा था, लेकिन आधी रात में विलय की बात कभी नहीं सुनी थी।

इस दौरान हाई कोर्ट में मौजूद विधानसभा अध्यक्ष के वकील सत्यपाल जैन ने कहा कि इस संबंध में अध्यक्ष द्वारा लिया गया निर्णय उनका संवैधानिक अधिकार है और यह न्यायिक समीक्षा के दायरे से परे है। बाद में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट में उन्होंने यह दलील भी रखी कि याचिकाकर्ता को आदेश को चुनौती देने का कोई आधार नहीं है। वह इस पूरे मामले में पार्टी में भी नहीं है।

गौरतलब है कि एमजीपी के दो विधायक मनोहर अजगांवकर और दीपक पवास्कर भाजपा में शामिल हो गए थे। दोनों ही विधायकों ने कार्यवाहक स्पीकर माइकल लोबो को पत्र सौंपकर एमजीपी की भाजपा के संग विलय की घोषणा की थी। 36 सदस्यों वाले गोवा विधानसभा में दो एमजीपी विधायक आने के बाद भाजपा के पास कुल 14 विधायक हैं।

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