नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। चीन और रूस के खिलाफ लामबंदी में जुटे दुनिया के सबसे अमीर व लोकतांत्रिक देशों का संगठन जी-7 भारत को अपनी तरफ आकर्षित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। इन देशों को इस बात का पूरा अहसास है कि खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा जैसी मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना भारत के बगैर नहीं किया जा सकता। इस बात का संकेत एलमाउ (जर्मनी) में जी-7 देशों के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जब पीएम नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की तो उनकी बाडी-लैंग्वेज से भी मिलता है। लेकिन पीएम मोदी ने भी भारत का रुख साफ कर दिया कि ऊर्जा खरीद मामले पर वह सिर्फ अपने राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रख कर फैसला करेगा।

यह बात विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने जी-7 देशों की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कही। इस बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, जापान और इटली के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा भारत, सेनेगल, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका के प्रमुखों ने विशेष आमंत्रण के तहत हिस्सा लिया। पीएम मोदी की इनमें से कई देशों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी हुई हैं। बैठक की जानकारी देते हुए विदेश सचिव ने बताया कि पीएम मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा मुद्दे पर दो बार अपने विचार रखे।

खाद्य सुरक्षा के बारे में उन्होंने विकसित देशों को आश्वस्त किया कि भारत इस मुद्दे की गंभीरता को समझता है और अपने स्तर पर कई दूसरे देशों की जरूरत को समझते हुए उन्हें खाद्यान्न की आपूर्ति कर रहा है। इसी तरह से ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भारतीय प्रधानमंत्री ने यूक्रेन-रूस युद्ध की स्थिति की वजह से ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि से काफी समस्या हो रही है। साथ ही उन्होंने यह भी जोर दे कर कहा कि ऊर्जा खरीद को लेकर भारत कोई भी फैसला अपनी ऊर्जा-सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही कर रहा है। क्वात्रा ने यह भी बताया कि तेल खरीद को लेकर भारत की इस भावना को सभी देश भली-भांति समझते हैं।

चीन पर भी साधा गया निशाना

सनद रहे कि जर्मनी के तत्वाधान में दो दिन तक चली उक्त बैठक के बाद कई तरह की घोषणाएं हुई हैं। जी-7 के संयुक्त घोषणा पत्र में चीन पर भी कई तरह से निशाना लगाया गया है जबकि रूस को भी यूक्रेन मुद्दे पर घेरने की जबरदस्त कोशिश दिखती है। इसमें मानवाधिकार के मुद्दे पर चीन को घेरा गया है। खास तौर पर तिब्बत और शिनजियांग इलाके में अल्पसंख्यकों की स्थिति का मामला उठाया गया है।साउथ चाईना सी में चीन की आक्रामक गतिविधियों का मामला भी उठाया गया है और उससे कहा गया है कि वह समुद्री क्षेत्र में आवागमन को लेकर अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करे। चीन से आग्रह किया गया है कि वह संबंधित विवादों का अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निपटारा करे और इसमें किसी भी तरह के भय, दबाव की रणनीति का इस्तेमाल न करे।

यूक्रेन के समर्थन में घोषणा पत्र, हमले का जिम्मेदार रूस को बताया

इन सात देशों ने यूक्रेन को समर्थन देने वाला भी एक घोषणा पत्र जारी किया है। इसमें यूक्रेन पर हमले के लिए रूस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है और इस पूरे हालात से उपजी समस्याओं से निपटने के लिए सामूहिक तौर पर काम करने की बात है। यह भी कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून व नियमों को पालन करने को लेकर रूस किस तरह का व्यवहार दिखाता है, उसके आधार पर ही उसके साथ रिश्तों को तय किया जाएगा।

अभिव्यक्ति की आजादी पर दिखाई प्रतिबद्धता

बैठक में शामिल जी-7 और इसके पांचों साझेदार देशों की तरफ से बाद में जारी संयुक्त बयान में अभिव्यक्ति की आजादी, सार्वजनिक विमर्श, आन-लाइन व आफ-लाइन के जरिये सूचनाओं को निर्बाध तरीके से प्रसार को लेकर प्रतिबद्धता जताई गई है। इसमें सिविल सोसायटी को भी पूरी स्वतंत्रता देने और उनकी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की बात है। इस संयुक्त बयान को दुनिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों की तरफ से रूस व चीन में सीमित अधिकार वाली शासन व्यवस्था चलाने वाली सरकारों को संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

इन सभी 12 देशों ने कहा है कि वो पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित उक्त व्यवस्थाओं को लागू करने में सहयोग करेंगे। इस बारे में हुई बैठक में पीएम मोदी ने भी हिस्सा लिया है। इसमें यह भी कहा गया है कि सभी देश उक्त सिद्धांत को लेकर प्रतिबद्ध हैं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए भी तैयार हैं। यह भी कहा गया है कि ये देश मानवाधिकार की रक्षा करने, भ्रष्टाचार को सामने लाने वाले, वैज्ञानिक तथ्यों को बढ़ावा देने वालों और लोकतांत्रिक चर्चाओं को बढ़ावा देने वालों की रक्षा करेंगे।

Edited By: Arun Kumar Singh