जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अगले हफ्ते होने वाली मुलाकात दोनो देशों के बीच तनावपूर्ण कारोबारी मुद्दों को सुलझाने वाले साबित हो सकते हैं। दोनो देशों के बीच पिछले तीन दिनों से लगातार कई स्तरों पर कारोबारी मुद्दों को सहमति बनाने के लिए गंभीर कोशिश चल रही है। इस कोशिश में दोनो देशों के राजदूत अहम भूमिका निभा रहे हैं। बहुत संभव है कि ट्रंप व मोदी संयुक्त तौर पर ऐसी घोषणा करें जिसे अपने अपने देश में कारोबारी जीत के तौर पर पेश किया जा सके। इसके तहत भारत की तरफ से कुछ अमेरिकी उत्पादों पर सीमा शुल्क की दर घटाने का ऐलान भी संभव है।

भारत व अमेरिका के अधिकारियों के बीच हो रही वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दोनो नेताओं की तरफ से जो घोषणा होगी वह सभी विवादित कारोबारी मुद्दों का समाधान तो नहीं होगा लेकिन इससे साफ संकेत जाएगा कि मोदी व ट्रंप ने द्विपक्षीय कारोबार की गाड़ी को फिर से पटरी पर ला दिया है।

हकीकत में देखा जाए तो ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत-अमेरिका के कारोबारी रिश्तों को लेकर कोई सकारात्मक सूचना नहीं आई है। स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत की ट्रेड नीति को लेकर कई बार तल्ख टिप्पणियां की है।

कारोबारी दुनिया को दिया जाएगा संदेश

वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने द्विपक्षीय कारोबार का लक्ष्य 500 अरब डॉलर तय करने का प्रस्ताव किया था लेकिन पिछले चार वर्षो में दोनो देशों के वाणिज्य व उद्योग मंत्रालयों की तरफ से इस बारे में कोई पहल नहीं हुई है। दोनो देशों के कारोबारी इसको लेकर अपनी नाराजगी भी जताते रहे हैं। ऐसे में ट्रंप व मोदी की तरफ से कारोबारी दुनिया को यह संकेत दिया जाएगा कि दोनो देशों की सरकारें द्विपक्षीय कारोबार की समस्याओं को सुलझाने को लेकर गंभीर हैं। माना जा रहा है कि भारत की तरफ से अमेरिकी कंपनियों द्वारा निर्मित स्वास्थ्य उपकरणों के आयात को लेकर नरमी बरतने को तैयार है।

44 अमेरिकी सांसदो ने ट्रंप को लिखा पत्र

उधर, अमेरिका के 44 सांसदों के एक समूह ने राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिख कर भारत को फिर से GSP (जेनेरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रीफ्रेरेंस- वरीयताप्राप्त विकासशील देशों की सूची) में शामिल करने का आग्रह किया है। इसके तहत भारत में निर्मित कई उत्पादों को अमेरिका में आसानी से आयात करने की छूट होती है। पिछले दिनों भारत के साथ दूसरे कारोबारी मुद्दों को आधार बनाते हुए ट्रंप प्रशासन ने भारत से यह सुविधा वापस ले ली थी।

अमेरिका और चीन के बीट ट्रेड वार

ट्रंप को पत्र लिखने वाले 22 डेमोक्रेट और 18 रिप्बलिकन सांसद है। इसमें लिखा गया है कि ट्रंप प्रशासन के फैसले से भारत से ज्यादा अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंच रहा है। यह इसलिए हो रहा है कि अभी अमेरिका व चीन के बीच विवाद कारोबारी मुद्दों पर भारी झगड़ा चल रहा है। ऐसे में GSP के तहत जिन उत्पादों का भारत से आयात किया जा रहा था उनका आयात पहले से भी ज्यादा होने लगा है।

अमेरिकी कंपनियां उन भारतीय उत्पादों को ज्यादा शुल्क देने के बावजूद आयात कर रहे हैं। इसकी वजह से जुलाई, 2019 में अमेरिकी कंपनियों को 3 करोड़ डॉलर की चपत लगने की बात भी इस पत्र में कही गई है। सनद रहे कि भारत की तरफ से भी अमेरिका से आग्रह किया गया है कि वह जीपीएस को जल्द से जल्द पुर्नस्थापित करे।

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सूत्रो के मुताबिक अभी तक जो बातचीत हो रही है उसमें अमेरिकी पक्ष की तरफ से नरमी जताई गई है। राष्ट्रपति ट्रंप को यह बात समझ में आ गई है कि चीन के साथ चल रहे कारोबारी विवाद का जल्दी से समाधान नहीं निकल सकता। इनके मुकाबले भारत के साथ कारोबारी विवादों का समाधान निकालना आसान है। इसे वह अपने घरेलू राजनीति में भी एक जीत के तौर पर पेश कर सकते हैं।

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Posted By: Dhyanendra Singh

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