नई दिल्ली, जेएनएन। पूर्वी लद्दाख में एलएसी से सटे इलाकों से अपने सैनिकों को हटाने में आनाकानी कर रहे चीन को भारत ने एक बार फिर चेताया है। भारत ने कहा है कि सीमा विवाद को किस तरह से सुलझाया जाता है इससे ही दोनों देशों के भविष्य के रिश्ते तय होंगे। भारत ने यह भी दोहराया है कि चीन को गंभीरता दिखाते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से अपने सैनिकों की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करना चाहिए। हालांकि यह भी कहा गया है कि देशों के बीच विवाद सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत की प्रक्रिया वैसे जारी रहेगी।

भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रक्रिया तब सामने आई है जब नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वीडोंग की तरफ से यह बयान आया है कि सीमा पर तनाव खत्म करने की जिम्मेदारी चीन की नहीं है। चीनी राजदूत सुन वीडोंग ने पूर्वी लद्दाख में मौजूदा सीमा विवाद के लिए भारत को ही जिम्मेदार ठहराया है। वैसे दोनों तरफ से एलएसी पर जबरदस्त सैन्य तैयारियां चल रही हैं। साथ ही सैन्य एवं कूटनीतिक स्तर की बातचीत भी चल रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि अगले स्तर की बातचीत भी जल्द ही होगी।

अनुराग श्रीवास्तव ने चीनी राजदूत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि यह बात जान लेना जरूरी है कि सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों के बीच जो सहमति बनी थी उसे पूरी तरह से लागू किए बिना स्थाई शांति स्थापित नहीं हो सकती है। यह एक जटिल प्रक्रिया है क्योंकि सेनाओं को अपने अपने सामान्य पोस्ट पर लौटाने की व्यवस्था करनी पड़ती है। हम चाहते हैं कि सैनिकों की वापसी शीघ्रता से पूरी हो लेकिन इसके लिए दोनों ही पक्षों को लिए गए फैसलों को अमल में लाना होगा।

उल्‍लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच मई 2020 से ही पूर्वी लद्दाख में तनाव जारी है। यह तनाव चीनी सैनिकों की घुसपैठ से पैदा हुआ है। बीते 6 जून, 2020 को दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सैनिकों की वापसी की सहमति बनी थी लेकिन इसके बाद 15 जून, 2020 को सैन्य झड़प में 20 भारतीय सैनिकों के साथ ही कुछ चीनी सैनिकों की मौत हो गई थी। चार बार विदेश मंत्रालयों के बीच वार्ता और पांच बार सैन्य वार्ता के बावजूद अभी कई हिस्सों में चीनी सैनिक बने हुए हैं। भारत भी अपने सैनिकों की तैनाती लगातार बढ़ा रहा है।  

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