भोपाल, राज्य ब्यूरो। मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य सरकार ने किसानों के लिए अपना खजाना खोल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस (17 सितंबर) से मध्य प्रदेश में मनाए जा रहे गरीब कल्याण सप्ताह के तहत मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि राज्य के पात्र किसानों को सालाना 10 हजार रुपये सम्मान निधि दी जाएगी। अभी केंद्र सरकार की ओर से देशभर के किसानों को 6000 रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं। MP सरकार इसमें 4000 रुपये और मिलाकर किसानों को सम्मान निधि देगी।

भोपाल के मिंटो हॉल में आयोजित कार्यक्रम में 63 हजार किसानों को क्रेडिट कार्ड वितरित किए गए। इस दौरान मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश में किसानों की सम्मान निधि बढ़ाने का एलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सहकारी बैंकों को कर्ज माफी की बकाया राशि भी दी जाएगी। कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों को 800 करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया गया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को शून्य ब्याज पर कर्ज देने का काम जारी रहेगा। इसमें पशुपालक और मत्स्य पालकों को भी जोड़ा जाएगा।

मैं रोने वाला मुख्यमंत्री नहीं हूं..

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम में कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण खजाने की स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। मैं रोने वाला मुख्यमंत्री नहीं हूं कि पैसा नहीं है। पिछली सरकार ने फसल बीमा के 2200 करोड़ रुपये का अंशदान जमा नहीं किया था। हमने सरकार में आते ही बीमा कंपनियों को राज्यांश दिया और किसानों को 3100 करोड़ रुपये का फसल बीमा दिलाया। इसके बाद 4600 करोड़ रपये से ज्यादा का फसल बीमा हाल ही में 22 लाख से ज्यादा किसानों को दिया है।

कृषि मंडी नहीं होंगी बंद

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विधेयकों को लेकर किसानों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है। देश में कोई भी मंडी बंद नहीं होगी और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था बंद होगी। मंडियों में अनाज की खरीद बिक्री का काम पहले की तरह चलता रहेगा। पीएम मोदी ने देश में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रावधान किए हैं, जो स्वागतयोग्य हैं। उन्होंने किसानों से पूछा कि यदि कोई आपके घर या खेत से ही अनाज खरीदकर ले जाए तो यह फायदे का सौदा हुआ या नहीं। किसानों को यह अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए कि वे मनमर्जी से उपज बेच सकें। सरकार इस बात की गारंटी देती है कि कोई भी व्यापारी किसान का पैसा लेकर भाग नहीं सकता। यह कानून किसानों के हित में है। हम विरोध करने वालों का विरोध करते हैं।

पिछली सरकार ने कर्जमाफी के नाम पर सहकारिता की काट दी गर्दन

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एमपी के किसानों की तस्वीर और तकदीर बदलनी है। सहकारिता आंदोलन का दुरुपयोग भी बहुत हुआ है। पिछली सरकार ने किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की, पर यह छलावा साबित हुई। इसके नाम पर सहकारिता की गर्दन काट दी। प्रदेश के सहकारी बैंकों को 15 सौ करोड़ रुपये नहीं दिए गए। किसानों से बोला गया कि दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाएगा, लेकिन इसमें पेंच फसा दिए कि किसी को लाभ ही नहीं मिल पाया।

सरकार ने माना, 27 लाख किसानों का कर्ज माफ हुआ

28 विस सीटों के उपचुनाव की सरगर्मी के बीच मप्र सरकार ने माना है कि राज्य के करीब 27 लाख किसानों के 11,500 करोड़ रुपये के कर्ज माफ हुए हैं। सोमवार को संपन्न विधानसभा के विशेष सत्र में कांग्रेस विधायकों-बाला बच्चन और जयवर्धन सिंह के लिखित सवालों के जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी। इसे लेकर मंगलवार को कांग्रेस नेताओं ने भाजपा की घेराबंदी की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि विधानसभा के रिकॉर्ड में कर्ज माफी के आंकड़ों से जाहिर होता है कि भाजपा छह महीने से लगातार झूठ बोल रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ ने बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस सरकार की किसान कर्जमाफी पर पहले दिन से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया झूठ बोलते रहे हैं। अब उन्हें माफी मांगना चाहिए।

 

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