नई दिल्‍ली, ऑनलाइन डेस्‍क। गणतंत्र दिवस पर दिल्‍ली में किसानों के उग्र आंदोलन की चौतरफा आलोचना हो रही है। यहां तक कि लाल किले के अंदर एक प्रदर्शनकारी ने पोल पर अपना झंडा लगाया। राजनीतिक दलों का कहना है कि हिंसा को किसी भी रूप में जायज नहीं ठहराया जा सकता है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिवसेना ने हिंसा की आलोचना की है। गौरतलब है कि किसान संगठनों की ट्रैक्टर परेड के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ झड़प हुई। इसके बाद पुलिस ने किसान समूहों पर आंसू गैस के गोले छोड़े तथा लाठीचार्ज किया।   

चोट किसी को भी लगे, नुकसान देश को

 कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है। चोट किसी को भी लगे, नुकसान हमारे देश का ही होगा। देशहित के लिए कृषि-विरोधी कानून वापस लो। 

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जनता और व्यवस्था के बीच गतिरोध भारतीय लोकतंत्र के हित में नहीं है। उन्होंने हिंसक घटनाओं से पल्ला झाड़ने के लिए किसान संघों पर भी निशाना साधा और उम्मीद जाहिर की कि किसान नेता अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलेंगे।

अराजकता को स्वीकार नहीं कर सकते

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने प्रदर्शनकारी किसानों के एक समूह द्वारा लाल किले में अपने संगठन का झंडा फहराने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए मंगलवार को कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही किसान आंदोलन का समर्थन किया है। लेकिन इस अराजकता को वे स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने ट्वीट किया, गणतंत्र दिवस पर कोई दूसरा ध्वज नहीं, बल्कि सिर्फ पवित्र तिरंगा लाल किले पर फहराया जाना चाहिए। 

कुछ तत्वों द्वारा की गई हिंसा अस्वीकार्य

पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से दिल्ली खाली करने की बात कहते हुए कहा, दिल्ली में चौंकाने वाले दृश्य दिखे। कुछ तत्वों द्वारा की गई हिंसा अस्वीकार्य है। यह शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे किसानों द्वारा उत्पन्न सद्भावना को नुकसान पहुंचाएगा। किसान नेताओं ने खुद को इससे अलग कर लिया और ट्रैक्टर रैली को स्थगित कर दिया। मैं सभी किसानों से दिल्ली खाली करने और बॉर्डर्स पर लौटने का निवेदन करता हूं।

लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं

राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री और वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि किसान आंदोलन अभी तक शांतिपूर्ण रहा है। किसानों से अपील है कि शांति बनाए रखें और हिंसा ना करें। लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। यदि इस आंदोलन में हिंसा हुई तो यह किसान आंदोलन को असफल बनाने की कोशिश कर रही ताकतों के मंसूबों की कामयाबी होगी इसलिए हर हाल में शांति बनाए रखें।

 ममता ने केंद्र का ठहराया जिम्‍मेदार

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर कहा कि पहले इन कानूनों को किसानों को विश्वास में लिए बिना पारित किया गया था। और फिर पूरे भारत में और पिछले 2 महीनों से दिल्ली के पास डेरा डाले हुए किसानों के विरोध के बावजूद वे उनसे निपटने में बेहद लापरवाह हैं। केंद्र को किसानों के साथ जुड़ना चाहिए और बेरहम कानूनों को निरस्त करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर होने वाली चिंता और दर्दनाक घटनाओं से बुरी तरह परेशान हूं। केंद्र के असंवेदनशील रवैये और हमारे किसान भाइयों और बहनों के प्रति उदासीनता को इस स्थिति के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए।

हिंसा के कारणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

एनसीपी के अध्‍यक्ष शरद पवार ने कहा कि पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने अनुशासित तरीके से विरोध किया, लेकिन सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। संयम समाप्त होते ही ट्रैक्टर मार्च निकाला गया। केंद्र की जिम्मेदारी कानून और व्यवस्था को नियंत्रण में रखने की थी, लेकिन वे विफल रहे। आज दिल्ली में जो हुआ कोई भी उसका समर्थन नहीं करता परंतु इसके पीछे के कारण को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पिछले कई दिनों से किसान धरने पर बैठे थे, भारत सरकार की जिम्‍मेदारी थी कि सकारात्मक बात कर हल निकालना चाहिए था। वार्ता हुई लेकिन कुछ हल नहीं निकला। 

राउत ने पूछा, किसका इस्तीफा मांगा जाना चाहिए

शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने भी दिल्ली में हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने पूछा है कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ गईं, इसकी जिम्मेदारी किसकी है? अब इसके लिए किसका इस्तीफा मांगा जाना चाहिए? सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे, शरद पवार या जो बाइडन का? राउत कहते हैं कि दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी तो किसी को लेनी पड़ेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि लालकिले पर तिरंगे का अपमान सहन नहीं किया जा सकता।

किसानों की मागों के प्रति सरकार का रवैया सही नहीं 

वाम दलों ने ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा की आलोचना करते हुए कहा कि स्थिति के इस हद तक जाने के लिए सरकार जिम्मेदार है। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, किसान 60 दिनों से अधिक समय से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे थे। उन्हें दिल्ली आने की इजाजत नहीं दी गई और 100 से ज्यादा किसानों की मौत हो गई। किसानों की कानूनी मांगों के प्रति सरकार जो रवैया दिखा रही है, वह सही नहीं है। भाकपा महासचिव डी राजा ने भी कहा कि हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को टाला जा सकता था। इन घटनाओं के लिए सरकार जिम्मेदार है। 

हिंसा की कड़ी निंदा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में हुई हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि आज की हिंसा की हम कड़ी निंदा करते हैं। यह खेदजनक है कि केंद्र सरकार ने इस हद तक स्थिति को बिगड़ने दिया। पिछले दो महीने से आंदोलन शांतिपूर्ण रहा है। किसान नेताओं ने कहा है कि जो लोग आज हिंसा में शामिल थे, वे आंदोलन का हिस्सा नहीं थे और वे बाहरी तत्व थे। वे जो भी थे, हिंसा ने निश्चित रूप से आंदोलन को कमजोर किया है जो अब तक इतने शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से चल रहा था।

दिल्ली से भाजपा के सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर की ओर से भी ट्वीट कर अपील की गई कि हिंसा को रोक दें, हिंसा से कोई भी हल नहीं निकलेगा।

असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ की

उधर, दिल्‍ली में हिंसा पर पल्‍ला झाड़ते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि हमारे सभी प्रयासों के बावजूद कुछ व्यक्तियों ने रूट का उल्लंघन किया और निंदनीय कृत्यों में लिप्त रहे। असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ की, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण रहा। हमने हमेशा कहा कि शांति हमारी ताकत है और हिंसा ऐसे आंदोलन को नुकसान पहुंचाती है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि आज के परेड में हिस्सा लेने के लिए हम सभी किसानों का धन्यवाद करते हैं। हम उन घटनाओं की भी निंदा करते हैं जो आज हुई हैं और ऐसे कार्यों में लिप्त होने वाले लोगों से खुद को अलग कर लेते हैं।

योगेंद्र यादव बोले, मेरा सिर शर्म से झुक गया  

स्वराज अभियान के संस्थापक योगेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर आज आज अद्भुत दृश्य है। उन्होंने कहा कि अब तक गण नीचे था, तंत्र ऊपर हो गया। आज गण ऊपर आ गया। योगेंद्र यादव ने कहा कि किसानों ने यह तय किया था कि आज हम उस जगह से आगे बढ़ेंगे, जहां हमें पिछले डेढ़-दो महीने से बैरिकेड्स लगाकर रोका गया है। उन्होंने लाल किले की घटना को लेकर पल्‍ला झाड़ते हुए कहा कि इससे मेरा सिर शर्म से झुक गया।

राजनीतिक दलों ने की घुसपैठ 

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि हम शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के लोग आंदोलन को बदनाम करना चाहते हैं।

दिल्‍ली में तोड़फोड़ साजिश का अंग 

ऑल इंडिया किसान सभा के महासचिव हन्नान मौला ने कहा कि आज दिल्ली में जिन्होंने तोड़फोड़ की, वे किसान नहीं किसान के दुश्मन हैं, ये साजिश का अंग है। आज की गुंडागर्दी से, साजिश से हमने सबक लिया है। भविष्य में आंदोलन में ऐसे लोगों को घुसने का मौका न मिले, हम शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन चलाएंगे। 

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