बेंगलुरु, एजेंसी। चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत ने एक बार फिर स्थिति स्पष्ट की है। भारत ने साफ कहा है कि जब तक सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं होती, दोनों देशों के बीच रिश्ते भी सामान्य नहीं हो सकते। चीन अगर सीमा पर शांति और स्थिरता को भंग करता है तो उसका असर दोनों देशों के संबंधों पर भी पड़ेगा।

भारत-चीन के मुद्दे पर बेंगलुरु में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, 'हम अपने रुख पर कायम हैं कि अगर चीन सीमावर्ती इलाकों में शांति को भंग करता है तो इससे हमारे संबंधों पर असर पड़ेगा। हमारे संबंध सामान्य नहीं हैं, यह सामान्य नहीं हो सकता, क्योंकि सीमा पर स्थिति सामान्य नहीं है।'

विदेश मंत्री ने कहा कि बड़ी समस्या सीमा की स्थिति है और भारतीय सेना भी मौके पर डटी हुई है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब के स्थलों से पीछे हटने में कुछ प्रगति हुई है।

चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ड एंड रोड इंनीशिएटिव (बीआरआइ) के बारे में उन्होंने कहा, 'हमारी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है। तथ्य यह है कि तीसरा देश दूसरे देश के कब्जे वाले संप्रभु भारतीय क्षेत्र में काम कर रहा है।'

लिथुआनिया के संसदीय दल से मिले जयशंकर

विदेश मंत्री ने यहां लिथुआनिया के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मायकोलास मजौस्कस ने उन्हें 'हिस्ट्री आफ लिथुआनिया' शीर्षक से लिखी पुस्तक भी भेंट की। जयशंकर ने ट्वीट कर इस मुलाकात की जानकारी दी। भारत और लिथुआनिया के बीच करीबी द्विपक्षीय, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।

रोजगार पैदा करने पर काम कर रही है मोदी सरकार : जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार रोजगार सृजित करने वालों को मजबूती देने के लिए काम कर रही है, ताकि देश में अधिक नौकरियां पैदा हों। यहां कारोबारी समुदाय से बातचीत में जयशंकर ने कहा कि देश में उद्यमों का विकास हुआ है, लेकिन सप्लाई चेन की वृद्धि थोड़ी धीमी है।

Edited By: Arun Kumar Singh