जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। शनिवार को जब पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना की मुलाकात होगी तो इस रिश्ते को प्रगाढ़ रणनीतिक साझेदारी में बदलने पर जोर दिया जाएगा। भारत की तरफ से बांग्लादेश की मदद के लिए कुछ अहम घोषणाएं भी की जाएंगी।

शेख हसीना गुरुवार को नई दिल्ली पहुंच गई। बांग्लादेश को एशिया की सबसे तेज गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बनाने के बाद यहां पहुंची शेख हसीना के एजेंडा में आर्थिक सहयोग ज्यादा है। लेकिन जिस तरह से भारत में एनआरसी का मुद्दा राजनीतिक रंग ले रहा है उसे देखते हुए वह भारत से ठोस आश्वासन भी चाहेंगी।

पड़ोसी मित्र देश के लिए भारत का भावी एजेंडा

  • दक्षिणी बांग्लादेश के पायरा में बंदरगाह बनाने की योजना
  • बांग्लादेश के लिए विशेष ऊर्जा संयंत्र लगाने पर भी विचार
  • जापान व भारत मिल कर बांग्लादेश में लगाएंगे एक बड़ी सड़क परियोजना
  • तीन बड़े रेलवे नेटवर्क पर भारत की मदद से काम शुरु
  • भविष्य में एक एलएनजी टर्मिनल लगाने पर हो रही बात

पिछले हफ्ते मोदी और हसीना के बीच हुई थी मुलाकात

मोदी और हसीना के बीच पिछले हफ्ते भी न्यूयार्क में द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी। उसके ठीक बाद शेख हसीना का आधिकारिक दौरे पर यहां आना बताता है कि दोनो देश आपसी रिश्तों को कितना महत्व दे रहे हैं। शनिवार को दोनो नेताओं के समक्ष एक ऐतिहासिक जलमार्ग समझौता भी होने वाला है जिसमें त्रिपुरा के गोमती नदी और बांग्लादेश के मेघना नदी के बीच आवागमन शुरु हो सकेगा।

इसके अलावा दोनो नेताओं के बीच बांग्लादेश में एक एलएनजी टर्मिनल लगाने के प्रस्ताव पर भी बात होगी। इसके अलावा भारत जापान की मदद से बांग्लादेश में एक बड़ी सड़क परियोजना लगाने का मुद्दा भी है जिसके रोडमैप पर दोनो पक्षों के बीच बात होनी है।

कनेक्टिविटी परियोजनाओं को अंतिम रूप दे रहा भारत

जानकारों के मुताबिक मोदी और शेख हसीना अब द्विपक्षीय रिश्तों को रणनीतिक सहयोग में तब्दील करने की तरफ ले जाने को इच्छुक हैं। यह बैठक इस लिहाज से काफी अहम साबित होगी जो रिश्तों को अगले मुकाम पर ले जाने वाली साबित होगी।

तकरीबन एक वर्ष पहले भारत ने बांग्लादेश में तीन बड़ी रेल परियोजनाओं को लगाने का ऐलान किया था। अब भारत वहां दूसरी कनेक्टिविटी परियोजनाओं को शुरु करने की योजना को अंतिम रूप दे रहा है। इसमें दक्षिण बांग्लादेश स्थित पायरा में एक बंदरगाह स्थापित करना भी शामिल है। जापान की मदद से वहां राष्ट्रीय महत्व की एक सड़क परियोजना लगाने की बात हो रही है जो वहां की आर्थिक विकास की गति को और तेज कर सकता है।

भारत से बांग्लादेश को होती है बिजली की आपूर्ति

सोच यह है कि इस परियोजना के लिए सड़क भारत बनाए जबकि इसमें ब्रिज निर्माण का काम जापान की मदद से की जाए। बांग्लादेश के लिए भारत एक विशेष पावर प्लांट लगाने को भी तैयार है लेकिन यह काम पूरी तरह से पड़ोसी देश के साथ विमर्श के बाद होगा। अभी भी भारत से बांग्लादेश को तकरीबन 1160 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जाती है जो वहां के कुल बिजली खपत का 10 फीसद से भी ज्यादा है। लेकिन जिस हिसाब से वहां की अर्थव्यवस्था में विकास हो रहा है उसे देखते हुए भारत एक नई बिजली परियोजना भी लगाने को तैयार है।

Posted By: Dhyanendra Singh

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