नई दिल्‍ली, पीटीआइ/एएनआइ। मध्‍य प्रदेश में वार पलटवार के बीच नेता मर्यादा की सीमा रेखा भी पार कर जा रहे हैं। इस बीच निर्वाचन आयोग विवादित बयानों को लेकर सख्‍ती दिखाई है। निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को आचार संहिता के उल्‍लंघन पर मध्‍य प्रदेश के पूर्व सीएम एवं दिग्‍गज कांग्रेस नेता कमल नाथ पर सख्‍त कार्रवाई की। आयोग ने कमल नाथ (Kamal Nath) के स्‍टार कैंपेनर का दर्जा रद कर दिया है। इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने कहा है कि वह निर्वाचन आयोग के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। 

निर्वाचन आयोग का कदम अलोकतांत्रिक 

मध्‍य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया कोऑर्डिनेटर नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि चुनाव आयोग द्वारा कमल नाथ के स्‍टार कैंपेनर का दर्जा रद किए जाने को पार्टी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा, 'चुनाव प्रचार खत्‍म होने के ठीक दो दिन पहले निर्वाचन आयोग की ओर से ऐसा किया जाना अलोकतांत्रिक है। निर्वाचन आयोग ने इस फैसले से पहले कमल नाथ और कांग्रेस पार्टी को कोई नोटिस भी नहीं दिया। हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।'

बार बार की नियमों की अनदेखी 

समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने यह भी कहा है कि स्‍टार कैंपेनर का दर्जा रद किए जाने के बाद अब आगे वह जिस विधानसभा में प्रचार करेंगे उनके उस चुनावी अभियान का पूरा खर्च संबंधित उम्‍मीदवार के खाते में जाएगा। कमल नाथ के खिलाफ यह कार्रवाई उनके बार बार आचार संहिता के नियमों की अनदेखी के चलते की गई है। अब आगे कमल नाथ जिस प्रत्‍याशी के लिए प्रचार करेंगे उनकी यात्रा और ठहरने से लेकर तमाम खर्च उम्‍मीदवार के चुनावी खर्च में जुड़ेगा। 

महिला अयोग ने चुनाव आयोग को लिखा था पत्र 

बता दें कि हाल ही में कमलनाथ ने भाजपा प्रत्‍याशी इमरती देवी पर अमर्यादित बयान दिया था। इसे लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग में शिकायत की थी। वहीं महिला अयोग ने चुनाव आयोग से कमल नाथ पर उचि‍त कार्रवाई करने की अपील की थी। आयोग ने इस मामले में कमल नाथ को नोटिस जारी कर 48 घंटे के  भीतर जवाब मांगा था। बीते दिनों आयोग ने कहा था कि कमल नाथ ने भाजपा की महिला प्रत्याशी के खिलाफ अमर्यादित शब्द का इस्तेमाल कर आचार संहिता तोड़ी है।  

इन बयानों की वजह से उठाया कदम

- इमरती देवी के खिलाफ जनसभा में अपशब्द का उपयोग किया।

- सीएम शिवराज सिंह चौहान को नौटंकी का कलाकार बताते हुए कहा था, 'मुंबई जाकर एक्टिंग करें।'

- आपके भगवान (शिवराज) तो वो माफिया हैं। आपके भगवान तो मिलावटखोर हैं।

स्टार प्रचारकों की सूची में तीसरे नंबर पर था नाम

राजनीतिक दल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1971 के तहत चुनाव के लिए स्टार प्रचारक घोषित करते हैं। सामान्यत: दल ऐसे नेताओं को इसमें शामिल करते हैं, जो मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को दी जाती है। कमल नाथ का नाम कांग्रेस के 30 स्टार प्रचारकों की सूची में तीसरे नंबर पर था।

कार्रवाई से पड़ेगा यह फर्क

निर्वाचन आयोग ने मध्‍य प्रदेश में 28 सीटों पर हो रहे विधानसभा उपचुनाव को लेकर उम्‍मीदवारों के चुनावी खर्चों की एक सीमा तय की है। स्टार प्रचारक के आने-जाने, ठहरने और सभा का व्यय पार्टी के खर्च में जुड़ता है। इससे प्रत्याशी के खर्च की जो अधिकतम सीमा है, वह प्रभावित नहीं होती है। अब कमल नाथ के स्टार प्रचारक नहीं रहने से उनका खर्च प्रत्याशी के व्यय में जुड़ेगा।

कमल नाथ बोले, मेरी आवाज को दबाने का हो रहा प्रयास 

निर्वाचन आयोग की कार्रवाई के बाद कमल नाथ ने कहा कि यह मेरी आवाज को दबाने का प्रयास है। कांग्रेस की आवाज को कुचलने की कोशिश है। सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं। जनता सच्चाई का साथ देगी। वहीं प्रदेश भाजपा ने कहा है कि कमल नाथ अहंकार में चूर थे। महिलाओं, मतदाताओं और प्रदेश की जनता का अपमान कर रहे थे। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि कमलनाथ से अपेक्षा तो नियम का ज्यादा पालन करने की थी, क्योंकि वे सबसे ज्यादा संसदीय अनुभव रखने वाले नेता हैं, मगर वे ऐसा नहीं कर सके। चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदम के लिए जिम्मेदार खुद कमल नाथ हैं।

चुन्नू-मुन्नू पर विजयवर्गीय को हिदायत

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी (चुन्नू-मुन्नू) को भी आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन माना है। आयोग ने इसे लेकर विजयवर्गीय को सख्‍त चेतावनी दी है। आयोग ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के खिलाफ कैलाश विजयवर्गीय की अभद्र टिप्पणी ('चुन्नू-मुन्नू') आचार संहिता का उल्लंघन है। हम विजयवर्गीय को आचार संहिता की अवधि के दौरान सार्वजनिक तौर पर ऐसे शब्‍दों का इस्तेमाल नहीं करने की नसीहत देते हैं। 

विजयवर्गीय ने यह दी थी सफाई 

समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक, निर्वाचन आयोग को दिए गए जवाब में विजयवर्गीय ने कहा था कि नोटिस में जिन टिप्पणियों का जिक्र किया गया है उन्‍हें संदर्भ से बाहर समझा गया है। लेकिन आयोग इस सफाई से सहमत नहीं हुआ उसने ने अपने आदेश में कहा है कि हमने मामले पर अच्छी तरह विचार-विमर्श किया और हमारा मानना है कि कैलाश विजयवर्गीय ने राजनीतिक दलों एवं उम्मीदवारों के मार्गदर्शन संबंधी आदर्श आचार संहिता के पहले भाग के दूसरे पैराग्राफ का उल्लंघन किया है। आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी नेता को आदर्श आचार संहिता लागू होने के दौरान सार्वजनिक तौर पर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

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