नई दिल्ली, प्रेट्र। चुनाव आयोग ने भाकपा, तृणमूल कांग्रेस और राकांपा की राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता निरस्त करने का फैसला टाल दिया है। 2019 के आम चुनाव में खराब प्रदर्शन के आधार पर आयोग यह कदम उठाने जा रहा था। आयोग के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि तीनों पार्टियों के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया है।

विधानसभा चुनावों में पार्टियों के प्रदर्शन में होगा सुधार

तीनों पार्टियों ने आयोग से कहा है कि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। निश्चित रूप से इन चुनावों में उनके प्रदर्शन में सुधार होगा। सूत्र ने कहा, 'हमने उनका अनुरोध स्वीकार कर लिया है और फैसला टाल दिया है।' 'राष्ट्रीय पार्टी' का दर्जा हासिल करने के लिए किसी पार्टी के पास कम से कम चार राज्यों में 'राज्य पार्टी' की मान्यता होनी चाहिए।

जानें कैसे मिलता है राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा  

चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश 1968 के अनुसार किसी राजनीतिक पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता मिल सकती है। इसके लिए लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार या उससे ज्यादा राज्यों में कुल मतदान में से कम से कम छह फीसद उसके प्रत्याशियों के पक्ष में होने चाहिए। इसके अलावा लोकसभा में उसके कम से कम चार सदस्य होने चाहिए। उसके प्रत्याशी तीन राज्यों से कम से नहीं आने चाहिए।

प्रत्याशियों का प्रदर्शन अत्यंत खराब रहा

लोकसभा चुनाव में तृणमूल बंगाल में 22 सीटें, राकांपा महाराष्ट्र में चार सीटें और भाकपा तमिलनाडु में दो सीटें जीतने में कामयाब रही। अन्य राज्यों में उनके प्रत्याशियों का प्रदर्शन अत्यंत खराब रहा। यदि पार्टियों की मान्यता रद हो जाती है तो उसे पंजीकृत माना जाएगा लेकिन पार्टी की मान्यता नहीं होगी। वर्तमान में तृणमूल, भाजपा, बसपा, भाकपा, माकपा, कांग्रेस, राकांपा और मेघालय की नेशनल पीपुल्स पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल है।

 

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