चेन्नई, जेएनएन। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के छोटे बेटे एमके स्टालिन के हाथों डीएमके की कमान सौंप दी गई है। मंगलवार को चेन्नई स्थित डीएमके हेडक्वार्टर में हुई पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक में स्टालिन को पार्टी का अगला अध्यक्ष चुना गया। वहीं पार्टी कोषाध्यक्ष के लिए वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन के नाम पर मुहर लगी। स्टालिन के अध्यक्ष बनने के बाद डीएमके कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है। जश्न में डूबे कार्यकर्ता स्टालिन को बधाई दे रहे हैं।

डीएमके अध्यक्ष बनने के बाद स्टालिन ने पार्टी संस्थापक सीएन अन्नादुरई और अपने पिता करुणानिधि को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने करुणानिधि की तस्वीर पर पुुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया।

करुणानिधि को भारत रत्न देने की मांग
डीएमके ने जनरल काउंसिल की बैठक में करुणानिधि को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित किया है। डीएमके ने केंद्र सरकार से करुणानिधि को भारत रत्न देने की मांग की है।

बतादें कि स्टालिन ने इसी रविवार को पार्टी अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया था। इसके अलावा वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन ने पार्टी कोषाध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा था।

अलागिरी ने भी ठोका दावा
करुणानिधि का 7 अगस्त को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद डीएमके के उत्तराधिकारी की जंग तेज हो गई थी। पार्टी से निष्कासित बड़े भाई अलागिरी ने डीएमके पर अपना दावा ठोका था। अलागिरी ने दावा किया कि करुणानिधि के सच्चे कार्यकर्ता मेरे साथ हैं। उन्होंने स्टालिन के नेतृत्व पर सवाल भी खड़े किए थे।

बता दें करुणानिधि ने काफी पहले ही स्टालिन को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर उन्हें डीएमके का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। वहीं संप्रग सरकार में केंद्रीय मंत्री बने रहने के बाद 2014 में अलागिरी को पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था। बर्खास्त होने से पहले दोनों भाइयों के बीच उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष चरम पर रहा।

Posted By: Manish Negi