संजय मिश्र, नई दिल्ली। कोरोना महामारी से लडाई के लिए सांसद निधि को दो साल स्थगित करने के फैसले पर कांग्रेस के अंदर मतभेद खुले तौर पर सामने आ गए हैं। पार्टी ने आधिकारिक रूप से जहां इस पर एतराज उठाया है, वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एमपीलैड के निलंबन का समर्थन किया है। जबकि जयराम के इस रुख से इतर पार्टी के तमाम लोकसभा सांसदों ने सोशल मीडिया पर एमपीलैडस को स्थगित करने को तमाम संसदीय क्षेत्रों की जनता के खिलाफ बताया है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने तो जयराम रमेश पर सीधा हमला करते हुए कहा कि जिन लोगों ने कभी चुनाव न लड़ा हो वही ऐसी बात कर सकता हे।

कीर्ति चिदंबरम ने की जयराम रमेश की जबरदस्‍त खिंचाई 

सांसद निधि के स्थगन को लेकर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के एतराज का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे लोकसभा कार्ति चिदंबरम ने अपनी ही पार्टी के थिंक-टैंक और हाईकमान के करीबी माने जाने वाले जयराम रमेश की खुले तौर पर जबरदस्त खिंचाई की। जयराम ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे पहले से कहते रहे हैं कि इस 7000 करोड रुपये का इस्तेमाल सरकारी खर्च पर चुनाव कराने के लिए किया जाना चाहिए।

पार्टी का आधिकारिक स्‍टैंड इसके विरोध में

कार्ति ने जयराम के इस टवीट पर सीधे उन्हें जवाब देते हुए कहा कि ऐसी बात वही कर सकता है जिसने कभी चुनाव न लड़ा हो और उसे कभी जनता को सीधे जवाब नहीं देना पड़ा हो। जयराम पर तंज कसते हुए कार्ति ने कहा कि शहरी मानसिकता वाले लोग इसका स्वागत कर रहे हैं वे उनके संसदीय क्षेत्र शिवगंगा में आकर देखें कि सांसद निधि स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए कितना लाभकारी है। वैसे जयराम का रुख पार्टी के आधिकारिक नजरिये से भी मेल नहीं खाता क्योंकि रणदीप सुरजेवाला ने कांग्रेस की ओर से सांसद निधि के दो साल के निलंबन को वापस लेने की मांग की है। 

अभिषेक मनु सिंघवी ने किया समर्थन 

जयराम की तरह पार्टी के दूसरे राज्यसभा सांसद अभिषेक सिंघवी भी धीमे सुर में एमपीलैड के निलंबन का समर्थन करते हुए दिखे और कहा कि शायद ऐसा करना जरूरी हो। हालांकि इसके विपरीत कांग्रेस के तमाम लोकसभा सांसद मनीष तिवारी, शशि थरूर, कार्ति चिदंबरम, तरूण गोगोई और मणिक्कम टैगोर ने जयराम के रुख से उलट सोशल मीडिया पर खुलकर एमपलैडस के स्थगन का विरोध किया। शशि थरूर ने तो बिना देरी किए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि बेशक एमपीलैडस की यह राशि कोरोना महामारी से लडाई में खर्च की जाए मगर यह स्थानीय स्तर पर सांसदों के इलाके में ही हो और इस राशि को केंद्र सरकार की समेकित निधि में शामिल करने के फैसले पर पुनर्विचार हो।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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