नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोरोना वायरस से देश की अर्थव्‍यवस्‍था को बचाने की रणनीति बनाने के लिए गठित पैनल ने अपना काम शुरू कर दिया है। आर्थिक मामलों के सचिव अताणु चक्रवर्ती की अगुवाई में इस गठित पैनल ने सबसे पहले समूचे देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर काम शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन लगने के बावजूद अभी तक देश के किसी भी हिस्से से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कमी को लेकर कोई सूचना नहीं आई है। लेकिन आने वाले दिनों में ऐसी ही स्थिति बनाये रखने के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों व निजी सेक्टर के बीच बहुत ही जबरदस्त सामंजस्य बनाये रखने की जरुरत होगी। यह पैनल इस बारे में सभी संबंधित पक्षों के बीच सामंजस्य बनाने का काम करेगा।

अर्थव्‍यवस्‍था को कई तरह की चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना 

पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को विभिन्न सेक्टर के लिए 11 अधिकार प्राप्त समूहों का गठन किया था। इसमें एक समूह अताणु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में बनाई गई है, जिसे कोरोना वायरस से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर और सरकार की तरफ से दी जाने वाली सहायताओं के बारे में फैसला करना है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार और इसकी विभिन्न एजेंसियों ने पहले ही कई तरह के आर्थिक पैकेज और वायरस के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले तमाम प्रभावों को काटने वाले कुछ उपायों का ऐलान कर दिया है। लेकिन जिस तरह के हालात बन रहे हैं उससे लगता है कि अर्थव्यवस्था को आगे चल कर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और इसकी रणनीति अभी से बनानी पड़ेगी।

किसी भी राज्य से किसी वस्तु की कमी की कोई सूचना नहीं

गठन के साथ ही समिति आरबीआई, सेबी व ईरडा के साथ विमर्श शुरू कर दिया है ताकि सभी नियामक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो। सूत्रों ने बताया कि लॉकडाउन होने की स्थिति में हर हिस्से में आवश्यक सामग्रियों को पहुंचाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दिया जा रहा है। अभी तक हालात पूरी तरह से सामान्य हैं। किसी भी राज्य से किसी वस्तु की कमी की कोई सूचना नहीं है। यहां तक पूर्वोत्तर के राज्यों, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भी खाने पीने की सभी वस्तुएं व रसोई गैस वगैरह पर्याप्त मात्रा में है। राज्यों के साथ मिल कर राशन के दुकानों पर अनाजों को पहुंचाने के लिए सभी समन्वय स्थापित किया जा चुका है। सरकार की तरफ से घोषित अतिरिक्त मोटे अनाज की व्यवस्था में भी कोई परेशानी है। खाने पीने की वस्तुएं बनाने वाली निजी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। पिछले दस दिनों के दौरान मांग के आधार पर आगे की तैयारी की जानी है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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