नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। 80 वर्ष पूर्व भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का मुखपत्र कहा जाने वाला नेशनल हेराल्‍ड भले ही आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा हो, लेकिन उसका अतीत बहुत गौरवशाली रहा है। इसकी बुनियाद खुद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। तब शायद उनको यह अंदाजा नहीं रहा होगा कि जिस अखबार का वह श्री गणेश कर रहे हैं उसकी इतनी दुर्दशा होगी। फिलहाल इसको लेकर कानूनी दांवपेंच को दौर बदस्तूर जारी है। इस मामले में आया हाईकोर्ट का ताजा फैसला कांग्रेस के लिए बड़ी समस्या माना जा रहा है। हाईकोर्ट के ताजा फैसले में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी और ऑस्कार फर्नांडिस द्वारा वर्ष 2011-12 में दायर किए गए आयकर रिटर्न की फाइल दोबारा खोलने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इस फैसले से पहले भी कई बार कांग्रेस की नैया इस मामले में हिचकोले खाती रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि नेशनल हेराल्‍ड का मामला कांग्रेस के लिए गले की फांस बन चुका है।   

आजादी के पहले शुरू हुआ था अखबार
नेशनल हेराल्‍ड भी उन अखबारों की श्रेणी में है, जिसकी बुनियाद आजादी के पूर्व पड़ी। हेराल्‍ड दिल्ली एवं लखनऊ से प्रकाशित होने वाला अंग्रेजी अखबार था। 1938 में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्‍ड अखबार की नींव रखी थी।  इंदिरा गांधी के समय जब कांग्रेस में विभाजन हुआ तो इसका स्‍वामित्‍व इंदिरा कांग्रेस आई को मिला। नेशनल हेराल्ड को कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता है। आर्थिक हालात के चलते 2008 में इसका प्रकाशन बंद हो गया। उस वक्‍त वह कांग्रेस की नीतियों के प्रचार प्रसार का मुख्‍य स्रोत था। 

मालिकाना हक
साल 2008 में अखबार का मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल्स कंपनी के पास था। एसोसिएट जर्नल्स ने कांग्रेस पार्टी से बिना ब्याज के 90 करोड़ का कर्ज लिया था, लेकिन इसका प्रकाशन फिर से शुरू नहीं हो सका। अप्रैल 2012 को सोनिया गांधी और राहुल गांधी की यंग इंडिया कंपनी ने एसोसिएटेड जर्नल्स का मालिकाना हासिल कर लिया।

स्‍वामी का आरोप 
भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आरोप है कि यंग इंडिया ने नेशनल हेराल्ड की 1,600 करोड़ रुपये की संपत्ति सिर्फ 50 लाख में हासिल की थी। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने 5 लाख रुपये से यंग इंडियन कंपनी बनाई। जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38 फीसद हिस्सेदारी है, बाकी की 24 फीसदी हिस्सेदारी कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि हेराल्ड हाउस को फिलहाल पासपोर्ट ऑफिस के लिए किराये पर दिया गया है। स्वामी का कहना है कि हेराल्ड हाउस को केंद्र सरकार ने समाचार पत्र चलाने के लिए जमीन दी थी, इस लिहाज से उसे व्यावसायिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। नेशनल हेराल्ड मामले में दिसंबर 2015 में सोनिया और राहुल गांधी पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे और कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी।

हाईकोर्ट ने पलटा पटियाला हाउस कोर्ट का फैसला  
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 11 मार्च 2016 को नेशनल हेराल्ड मामले में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की उस मांग को स्‍वीकार कर लिया था, जिसमें इंडियन नेशनल कांग्रेस (आइएनसी) और एसोसिएटेड जनरल प्रा.लि.(एजेएल) की वित्तीय जानकारी से जुड़े कुछ कागजात समन करने की मांग की गई थी। लेकिन जून 2016 में हाईकोर्ट ने पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को निरस्‍त करते हुए कहा कि CRPC के सेक्शन 91 के तहत कोई भी ऑर्डर करने से पहले आरोपी पार्टी को सुना जाना जरूरी है, जो इस मामले में नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी ने कैजुअल तरीके से एप्लीकेशन लगाई और उसी कैजुअल तरीके से पटियाला हाउस कोर्ट ने आदेश दे दिए। हालांकि, इसी आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

ये था आदेश 
कोर्ट ने इस आदेश में यह भी कहा कि वह निजी तौर पर राहुल और सोनिया से कांग्रेस और एसोसिएटेड जनरल प्राइवेट लिमिटेड की वित्तीय जानकारी से जुड़े दस्‍तावेज मांग सकते हैं, लेकिन यह उनकी मर्जी होगी कि वो इन्‍हें दस्‍तावेज उपलब्‍ध करवाएं या नहीं। हाईकोर्ट का यह आदेश राहुल और सोनिया दोनों के लिए बड़ी राहत थी। 27 मई 2018 को इस मामले में सबसे बड़ा उलटफेर उस वक्‍त हुआ जब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्‍होंने इस मामले से जुड़े  दस्तावेजों की मांग की थी। 

हाईकोर्ट का फैसला और निशाने पर कांग्रेस 
10 सितंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता ऑस्कर फर्नांडीस, सोनिया गांधी और पार्टी अध्‍यक्ष राहुल गांधी द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें इन्होंने 2011-12 के अपने कर निर्धारण की फाइल दोबारा खोले जाने को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति ए के चावला की पीठ ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया। इसके बाद से ही कांग्रेस अध्‍यक्ष समेत दूसरे बड़े नेता भाजपा के निशाने पर हैं। केंद्रीय मंत्री स्‍मृति इरानी ने हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरोप लगाया कि राहुल गांधी की कंपनी एसोसिएट्स जर्नल्स ने 50 लाख देकर 90 करोड़ का लोन लिया। स्मृति का आरोप है कि राहुल गांधी ने इनकम टैक्स नियमों का उल्लंघन किया है। 

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Posted By: Kamal Verma