नई दिल्‍ली, एएनआइ। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) के प्रमुख के नाम पर फैसला करने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति की गुरुवार को हुई बैठक बेनतीजा रही। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) निदेशक के चयन के लिए हुई बैठक के बेनतीजा रहने पर कहा, 'हमने प्रधानमंत्री से कहा कि बैठक जल्द से जल्द बुलाई जानी चाहिए, क्योंकि ऐसा नहीं होने पर ऐसा शख्स सीबीआइ का अंतरिम निदेशक बना रहेगा, जो उसके योग्य तक नहीं है।'

उन्‍होंने कहा कि देखिए, पहली गलती तो ये हुई कोई ऐसा व्यक्ति जो योग्य भी नहीं है, नियुक्त किया गया और दूसरी, बिना किसी विवरण के उन्होंने बैठक बुलाई। बैठक में यह देरी सरकार की गलती के कारण हुई है। यह बैठक 21 फरवरी से पहले होनी चाहिए, जब उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है।

अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि बैठक बेनतीजा रही। एक अधिकारी ने बताया, 'सक्षम अधिकारियों के दस्तावेजों के साथ उनकी सूची समिति के सदस्यों के साथ साझा की गयी। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।' उन्होंने कहा कि नाम तय करने के लिए समिति की एक और बैठक जल्द बुलाई जाएगी। प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी हिस्सा लिया। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में खड़गे ने कहा कि अधिकारियों के नाम साझा किये गये।

इससे पहले 10 जनवरी को सलेक्ट कमेटी की बैठक हुई थी। इस बैठक में सीबीआइ के डायरेक्टर आलोक वर्मा को पद से हटाने का फैसला लिया गया था। इसके बाद से ही डायरेक्टर की पोस्ट खाली है। फिलहाल एम नागेश्वर राव सीबीआइ के अंतरिम डायरेक्टर हैं। उनकी नियुक्ति के बाद काफी विवाद खड़ा हुआ था। इसको लेकर खड़गे ने पीएम को एक पत्र भी लिखा था। खड़गे ने इस पत्र में राव की नियुक्ति को गैरकानूनी बताया था और बिना किसी देरी के नए CBI प्रमुख की नियुक्ति के लिए चयन समिति को बुलाने के लिए निवेदन किया था। इसके बाद एम. नागेश्वर राव ने 20 अधिकारियों का तबादला कर दिया। इनमें 2जी घोटाले के जांच अधिकारी विवेक प्रियदर्शिनी भी शामिल हैं। दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में तैनात प्रियदर्शिनी का तबादला चंडीगढ़ किया गया।

नए डायरेक्टर की नियुक्ति के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही एक लिस्ट तैयार कर ली है। इस लिस्ट को समीक्षा के लिए डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग के पास भेज दिया गया है। यह डिपार्टमेंट सभी ऑफिसर की एंटी करप्शन केस के इन्वेस्टिगेशन के दौरान दिखाई गई सीनीयॉरिटी, इंटे्ग्रिटी और एक्सपीरियंस की जांच करेगी। इस पद के लिए शीर्ष दावेदारों में NIA के डीजी वाईसी मोदी शामिल हैं. असम और मेघालय कैडर के आईपीएस अफसर वाईसी मोदी सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के हिस्सा थे, जिसने 2002 के गुजरात दंगों की जांच की थी।

Posted By: Tilak Raj

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप