संजय मिश्र, नई दिल्ली। कांग्रेस के नए अध्यक्ष का चुनाव जून महीने तक टालने पर सहमति तो बन गई मगर कार्यसमिति की बैठक में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) का चुनाव कराने को लेकर खूब तकरार हुई। संगठन चुनाव को लेकर हुई इस अहम बैठक में कांग्रेस कार्यसमिति के साथ ही सीईसी का भी चुनाव कराए जाने की असंतुष्ट खेमे के नेताओं की मांग पर घमासान हुआ। 

गहलोत ने चुनाव की मांग पर बोला हमला 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अंबिका सोनी ने सीईसी के चुनाव की मांग को नेतृत्व पर अविश्वास जैसी बात करार देते हुए असंतुष्ट खेमे के नेताओं की हैसियत पर सवाल उठाया तो पलटवार करते हुए गुलाम नबी आजाद और आनंद शर्मा सरीखे असंतुष्ट नेता सीईसी का चुनाव कराने की मांग पर डटे रहे।

जून के आखिर तक मिल जाएगा नया अध्यक्ष 

बहरहाल कांग्रेस कार्यसमिति की इस वर्चुअल बैठक ने नए अध्यक्ष के चुनाव की समयसीमा का सस्पेंस जरूर खत्म कर दिया। पांच राज्यों के चुनाव के मद्देनजर संगठन चुनाव को आगे बढ़ाने का फैसला करते हुए कार्यसमिति ने तय कर दिया कि अब जून के आखिर तक कांग्रेस को नया निर्वाचित अध्यक्ष मिल जाएगा। 

जून के आखिर में बैठक पर सहमति

पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के प्रमुख मधुसूदन मिस्त्री ने संगठन चुनाव मई तक पूरा करने का कार्यक्रम कार्यसमिति को दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ ही असंतुष्ट खेमे के नेताओं ने भी राज्यों के चुनाव को देखते हुए संगठन चुनाव को कुछ आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। मई के बजाय जून के आखिर तक कांग्रेस के नए अध्यक्ष का चुनाव कराने पर बैठक में सर्वसम्मति बन गई। 

असंतुष्ट खेमे की एक बड़ी मांग

महासचिव केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला ने बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में चुनाव आगे बढ़ाने के निर्णय पर सर्वसम्मति होने की बात भी कही। सूत्रों के मुताबिक बैठक में पार्टी संविधान के हिसाब से अध्यक्ष के चुनाव के बाद कांग्रेस के प्लेनरी सत्र में कार्यसमिति के आधे सदस्यों का चुनाव कराए जाने की बात भी तय हो गई। कार्यसमिति का चुनाव असंतुष्ट खेमे की एक बड़ी मांग रही है। 

गुलाम नबी ने उठाई आवाज 

इसके बाद असंतुष्ट खेमे की ओर से गुलाम नबी आजाद ने सीईसी का चुनाव कराने की मांग पर जोर दिया तब सोनिया गांधी ने कहा कि सीईसी का चुनाव भी कराया जा सकता है। इसके बाद वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने कहा अच्छी बात है कि कार्यसमिति का चुनाव हो रहा है और सीईसी चुनाव की जरूरत नहीं है। 

हाईकमान के समर्थन में उतरीं अंबिका सोनी 

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और मुकुल वासनिक ने एंटनी से असहमति जताते हुए कहा कि पार्टी संविधान के हिसाब से सीईसी के नौ सदस्य चुनकर आते हैं और आधे का चयन कांग्रेस अध्यक्ष के हाथ में है और चुनाव होना चाहिए। इस पर हाईकमान के समर्थन में उतरते हुए अंबिका सोनी ने कहा कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद जब नए अध्यक्ष का कार्यकाल बाकी बची अवधि दिसंबर, 2022 तक के लिए ही है तो सीईसी चुनाव की मांग समझ से परे है। 

गहलोत ने हैसियत पर उठाया सवाल

हरीश रावत, रणदीप सुरजेवाला और अविनाश पांडेय ने अंबिका सोनी से सहमति जताई। हालांकि आनंद शर्मा ने फिर पार्टी संविधान के हिसाब से चुनाव की अनिवार्यता बताई। अशोक गहलोत इसके बाद बिफर पड़े और गुलाम नबी, आनंद शर्मा सरीखे नाराज नेताओं पर निशाना साधते हुए उनकी पहचान और हैसियत पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी आज जो पहचान है वह केवल कांग्रेस की वजह से है। 

शर्मा ने किया पलटवार 

गहलोत ने कहा कि पार्टी और उसके नेतृत्व ने इन नेताओं को मौका देकर इस मुकाम तक पहुंचाया है। ऐसी मांग करना सोनिया गांधी पर अविश्वास करने जैसा है। आनंद शर्मा ने भी इसके बाद तल्ख जवाब देते हुए गहलोत के बिफरने को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि कार्यसमिति में शालीनता व शिष्टाचार की मर्यादा इस तरह तोड़ा जाना अनुचित है। 

सोनिया गांधी के प्रति भरोसा जताया 

आनंद शर्मा ने कहा कि बेशक कांग्रेस की वजह से सबकी पहचान है मगर संगठन को दुरुस्त करने की बात उठाने में ऐसी कटुता ठीक नहीं। शर्मा ने यह भी कहा कि सोनिया गांधी के प्रति भरोसा और विश्वास तो हम सबका भी है। गहलोत और शर्मा के बीच हुई तकरार पर राहुल गांधी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि अशोक गहलोत की भावनाएं अपनी जगह चाहे सही हों मगर बैठक के दौरान कड़वाहट को लेकर आनंद शर्मा के उठाए सवाल भी सही हैं। 

सुरजेवाला बोले- कांग्रेस में कोई असंतुष्ट नहीं

गहलोत की टिप्पणियों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी सख्त बातें नहीं की जानी चाहिए थीं। इस दौरान राहुल ने भी कहा कि सीईसी का चुनाव कराने में कोई हर्ज नहीं है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बैठक में वाद-विवाद से इन्कार करते हुए कहा कि कांग्रेस में कोई असंतुष्ट नहीं है। आजाद, चिदंबरम और आनंद शर्मा सभी हमारे सम्मानित नेता हैं।

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