पुणे (प्रेट्र)। पुणे की अदालत ने भीमा कोरेगांव मामले में जून में गिरफ्तार किए गए पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने की समयसीमा और 90 दिनों के लिए बढ़ा दी है। पुलिस ने माओवादियों के साथ संपर्क के आरोप में सभी को गिरफ्तार किया था।गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विशेष अदालत के न्यायाधीश केडी वधाने ने रविवार को पुणे पुलिस का अनुरोध स्वीकार कर लिया। यह जानकारी मामले के जांच अधिकारी सहायक पुलिस आयुक्त शिवाजी पवार ने दी। 

उन्होंने कहा, 'हमने कोर्ट से यह कहते हुए संपर्क किया था कि मामले में जांच प्रगति पर है। इसीलिए आरोप पत्र दायर करने के लिए और 90 दिनों का समय मांगा था।'पुणे पुलिस ने आरोप पत्र दायर करने की समयसीमा बढ़ाने के लिए शनिवार को अदालत में अर्जी दायर की थी। पुलिस ने मामले में कुछ और गिरफ्तारी होने का उल्लेख किया था।

पिछले वर्ष 31 दिसंबर को एलगार परिषद आयोजित करने के संबंध में जून में सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को गिरफ्तार किया गया था। कार्यक्रम एक दिन बाद ही पुणे के समीप भीमा कोरेगांव हिंसा हुई थी।पुलिस ने 28 अगस्त को और पांच वामपंथी विचारकों को गिरफ्तार किया।
इन विचारकों में प्रसिद्ध तेलुगु कवि वरवर राव (हैदराबाद), वेरनान गोंजाल्विस व अरुण फरेरा (मुंबई), ट्रेड यूनियनिस्ट सुधा भारद्वाज (फरीदाबाद), मानवाधिकारवादी गौतम नवलखा (दिल्ली) शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को छह सितंबर तक उनके घरों में ही नजरबंद रखने का आदेश दिया है।

 

Posted By: Monika Minal