जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अदालत से पूछे बगैर मुजफ्फरपुर संरक्षण गृह की जांच कर रहे अधिकारी का तबादला करने पर सीबीआइ के पूर्व अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव और कानूनी सलाहकार एस. भासुरन को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अवमानना का दोषी ठहराया। शीर्ष कोर्ट ने माफीनामा ठुकराते हुए उन्हें एक हफ्ते में एक-एक लाख का जुर्माना भरने के साथ ही अदालत उठने तक दिनभर कोर्ट के कोने में बैठे रहने की सजा सुनाई।

इसके बाद दोनों दिनभर, यहां तक कि भोजनावकाश और कोर्ट उठने के करीब 40 मिनट बाद तक अदालत कक्ष में बैठे रहे। भले ही यह सजा सांकेतिक तौर पर दी गई, लेकिन इससे 58 वर्षीय वरिष्ठ आइपीएस अफसर राव के बेदाग सर्विस रिकॉर्ड में एक दाग जुड़ जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मुजफ्फरपुर बालिका संरक्षण गृह की जांच की अगुआई कर रहे सीबीआइ के संयुक्त निदेशक एके शर्मा का सीआरपीएफ के एडीशनल डीजी पद पर तबादला किए जाने के मामले में यह आदेश सुनाया। शीर्ष कोर्ट ने पिछले साल आदेश दिया था कि उससे पूछे बगैर जांच अधिकारी का तबादला नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद 18 जनवरी को एके शर्मा का तबादला कर दिया गया था।

सात फरवरी को जब कोर्ट को सुनवाई के दौरान यह पता चला तो उसने गहरी नाराजगी जताते हुए एके शर्मा को सीबीआइ से रिलीव करने वाले तत्कालीन अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव और सीबीआइ के कानूनी सलाहकार और तात्कालिक तौर पर निदेशक (अभियोजन) का कामकाज देख रहे एस. भासुरन को अवमानना में तलब किया था। दोनों ने अवमानना नोटिस पर सोमवार को जवाब दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी थी और मंगलवार को दोनों अधिकारी कोर्ट में पेश हुए थे।

माफीनामा नहीं किया स्वीकार
अधिकारियों की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि नागेश्वर राव ने गलती मानी है और बिना शर्त माफी मांगी है। लेकिन कोर्ट ने माफीनामे का हलफनामा अस्वीकार करते हुए कहा कि राव को कोर्ट के आदेश की जानकारी थी इसके बावजूद उन्होंने एके शर्मा के तबादले पर हस्ताक्षर किए। इसे अदालत की अवमानना नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे। कोर्ट ने एके शर्मा के ट्रांसफर को जायज ठहराने की भासुरन की कानूनी सलाह पर भी एतराज जताया। कोर्ट ने कहा कि जब कोर्ट ने उससे पूछे बगैर तबादला करने को मना किया था तो फिर ऐसी सलाह कैसे दी जा सकती है। वेणुगोपाल ने कहा कि राव से फैसला लेने में गलती हुई है, लेकिन उन्होंने जानबूझकर अवमानना नहीं की है। कोर्ट ने दलीलों से असहमति जताते हुए कहा कि दोनों अधिकारियों ने न्यायालय की अवमानना की है। कोर्ट इन्हें दोषी मानता है और अब आप सजा के मुद्दे पर जिरह करिए।

लगाया एक-एक लाख का जुर्माना
कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से पूछा कि वे अपनी सफाई में कुछ कहना चाहते हैं? उन्हें 30 दिन के लिए जेल भी भेजा जा सकता है। वेणुगोपाल ने रहम की गुहार लगाई। इसके बाद कोर्ट ने दोनों को अवमानना मे दोषी ठहराते हुए एक-एक लाख जुर्माने और कोर्ट उठने तक अदालत के कोने मे बैठे रहने की सजा सुनाई।

ज्यादा कहा तो कल तक कोर्ट में बैठा देंगे
दोपहर बाद एम. नागेश्वर राव और भासुरन ने कोर्ट से एक बार फिर माफी मांगने की कोशिश की। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि ये कोर्ट से माफी मांग रहे हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इन्हें कोर्ट उठने तक बैठे रहने की सजा दी गई है। जहां बैठे थे, वहीं जाकर बैठें। वरना कोर्ट सजा बढ़ाकर कल तक बैठा सकता है। इसके बाद दोनों फिर से चुपचाप जाकर अदालत कक्ष की दर्शक दीर्घा के कोने में जाकर बैठ गए। कोर्ट खत्म होने के बाद भी इस इंतजार में तब तक बैठे रहे जब तक अनुमति नहीं मिल गई।

 

Posted By: Vikas Jangra