संजय मिश्र, नई दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति ने राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश भले ठुकरा दी हो मगर कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के अपने रुख पर राहुल अब भी अड़े हुए हैं। लोकसभा चुनाव में करारी हार से पार्टी के समक्ष गहराए संकट के बीच राहुल के इस रुख से कांग्रेस में अंदरूनी हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, राहुल चाहते हैं कि गांधी परिवार से बाहर के पार्टी के किसी चेहरे को कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया जाए। लेकिन राहुल के रुख से असहमत कार्यसमिति ने प्रस्ताव पारित कर उनके नेतृत्व में पूरा भरोसा जताया है। साथ ही कांग्रेस के इस सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में राहुल गांधी के नेतृत्व को पार्टी की जरूरत बताया है। इतना ही नहीं, राहुल को पार्टी में नीचे से ऊपर तक आमूल-चूल बदलाव करने के लिए ब्लैंक चेक (खुली छूट) देने का प्रस्ताव भी पारित कर दिया।

लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के भविष्य पर गहराए संकट पर चर्चा के लिए शनिवार को बुलाई गई कार्यसमिति की बैठक में राहुल ने पराजय की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की। करीब चार घंटे चली कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस की पराजय की वजहों पर करीब 30 नेताओं के बोलने के बाद राहुल ने आखिर में अपना संबोधन किया। इसी क्रम में पार्टी की चुनावी शिकस्त की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी। साथ ही राहुल ने कार्यसमिति में मौजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से गांधी परिवार के बाहर के किसी चेहरे को नया अध्यक्ष चुनने के लिए कहा। मगर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर एके एंटनी समेत पूरी कार्यसमिति ने एक सुर में राहुल से कहा कि उन्हें इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है और पार्टी को राहुल की नेतृत्व क्षमता पर पूरा भरोसा है। सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी राहुल को ऐसा नहीं करने के लिए कहा। प्रियंका ने कहा कि जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला भाजपा के जाल में फंसने जैसा होगा। चुनावी हार पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपनी-अपनी बात रखी।

जल्द एक और बैठक की संभावना
कांग्रेस कार्यसमिति ने इसके बाद प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश को एकमत से ठुकरा दिया। इसके बाद भी राहुल ने पद छोड़ने के अपने इरादे जाहिर किए। राहुल के रुख को देखते हुए मौजूदा परिस्थितियों पर चर्चा के लिए जल्द एक बार फिर कार्यसमिति की बैठक बुलाए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा रहा है। कांग्रेस की चुनौती यह भी है कि गांधी परिवार से इतर किसी चेहरे के लिए पार्टी को एकजुट रखते हुए आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।

पार्टी को राहुल के नेतृत्व की जरूरत
कार्यसमिति की बैठक के बाद एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला ने संयुक्त प्रेस काफ्रेंस में कार्यसमिति के सर्वसम्मत प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी को मौजूदा चुनौतीपूर्ण और प्रतिकूल परिस्थितियों में राहुल गांधी के नेतृत्व और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। इसलिए कार्यसमिति ने यह भी आह्वान किया कि राहुल गांधी देश के युवाओं, किसानों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और सभी शोषित व वंचितों की समस्याओं के लिए आगे बढ़कर उनके हक के लिए जूझेंगे।

हार की होगी गहराई से पड़ताल
राहुल की पेशकश खारिज करने के बाद कार्यसमिति ने पार्टी की चुनावी हार की गहराई से पड़ताल का फैसला भी लिया। इस पड़ताल का स्वरूप कैसा होगा, इसका फैसला भी जल्द होगा। सुरजेवाला ने कहा कि कार्यसमिति में पराजय के कारणों पर शुरुआती चर्चा ही हुई। कार्यसमिति के प्रस्ताव में कहा भी गया है कि कांग्रेस उन चुनौतियों, विफलताओं और कमियों को स्वीकार करती है जिनकी वजह से ऐसा जनादेश आया है। कांग्रेस कार्यसमिति हर स्तर पर आत्मचिंतन के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष को अधिकृत करती है कि वह पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन और विस्तृत पुनर्सरचना करें। इसके लिए जो भी योजना हो, वह जल्द से जल्द लागू करें। राहुल गांधी को पूरा अधिकार दिया गया है कि वह कांग्रेस में हर स्तर पर जैसा चाहें वैसा बदलाव लाने के लिए कदम उठा सकते हैं।

संघर्ष की भावना पहले से ज्यादा मजबूत
सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस चुनाव हारी है, लेकिन हमारा अदम्य साहस, संघर्ष की भावना और सिद्धांतों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पहले से ज्यादा मजबूत है। कांग्रेस नफरत और विभाजन की ताकतों से लोहा लेने के लिए सदैव कटिबद्ध है।

इस्तीफा दिया तो दक्षिण में ध्वस्त हो जाएगी पार्टी : चिदंबरम
कार्यसमिति की बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि राहुल इस्तीफा न दें क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो दक्षिण भारत में पार्टी ध्वस्त हो जाएगी। यह कहकर वह भावुक हो गए। कई नेताओं ने सोनिया गांधी से भी अनुरोध किया कि वह राहुल को इस्तीफा देने से रोकें।

 

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Posted By: Krishna Bihari Singh