नई दिल्ली, जेएनएन। केंद्र सरकार सोमवार को तीन तलाक बिल राज्यसभा में पेश करने जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि लोकसभा के बाद ये बिल राज्यसभा में भी पारित हो जाएगा। हालांकि, विपक्षी दल सरकार की उम्मीदों को झटका देते दिख रहे हैं। दरअसल, इस बिल को लेकर विपक्षी दलों के तेवर नरम नहीं दिख रहे हैं। कांग्रेस ने तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पारित नहीं होने देने की घोषणा की है।

कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने साफ-साफ कहा है कि कांग्रेस इस बिल को राज्यसभा में पास नहीं होने देगी। शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि इस विधेयक को मौजूदा रूप में पास होने से रोकने के लिए कांग्रेस उन सभी पार्टियों से हाथ मिलाएगी, जिनके साथ मिलकर इसको गिराया जा सके।

उन्होंने बताया कि लोकसभा में जब यह विधेयक पेश किया गया, तब 10 विपक्षी पार्टियां खुलकर एक साथ आई थीं। यहां तक कि कई मुद्दों पर सरकार का समर्थन करने वाली अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस ने भी इसका विरोध किया।

वेणुगोपाल ने बिल की आलोचना करते हुए कहा कि तत्काल तीन तलाक एक दीवानी मामला है। इसके लिए अपराधियों की तरह कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, जो कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों को मंजूर नहीं है। यह बिल महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं करेगा।

अलप्पुझा के सांसद वेणुगोपाल ने कहा कि 2017 में सरकार ने ऐसा ही विधेयक लोकसभा से पारित करा लिया था। लेकिन, कठोर प्रावधान होने के कारण उसे राज्यसभा में आगे नहीं बढ़ा पाई थी। यही कारण है कि सरकार अध्यादेश लेकर आई और लोकसभा में फिर से बिल को पेश किया। लेकिन, कांग्रेस मौजूदा स्वरूप में बिल को राज्यसभा से पारित कराने का विरोध करेगी।

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 2019 के आम चुनाव को देखते हुए सरकार ने इस बिल को लोकसभा में पास कराने की जल्दबाजी की है। कांग्रेस का कहना है कि इस बिल के प्रावधान संविधान तथा मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।

गौरतलब है कि इसी हफ्ते गुरुवार को लोकसभा से तीन तलाक बिल को मंजूरी मिल गई थी। लोकसभा में 245 सांसदों ने इसके पक्ष में वोट किया था जबकि 11 ने इसके खिलाफ। वोटिंग के दौरान कांग्रेस, एआईएडीएम, सपा और राजद ने ने लोकसभा से वॉकआउट कर दिया था।

राज्यसभा में क्या है गणित?
राज्यसभा में आंकड़ों के हिसाब से इस समय एनडीए के पास 93 सांसद हैं। कांग्रेस की अगुआई वाले विपक्षी खेमे के पास 112 सांसद हैं। इस समीकरण से साफ है कि अन्नाद्रमुक के 13, बीजद के 9 टीआरएस के 6 और वाइएसआर कांग्रेस के 2 सदस्यों के समर्थन के बिना एनडीए सरकार राज्यसभा में तीन तलाक बिल पारित नहीं करा सकती। इस सियासी हकीकत को देखते हुए राज्यसभा में तीन तलाक बिल पारित होने की गुंजाइश नहीं दिख रही।

Posted By: Manish Negi

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस