जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने आइएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम को साजिश का शिकार बनाने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि जब फाइल पर हस्ताक्षर करने वाले छह सचिवों समेत 11 अधिकारियों ने कुछ गलत नहीं किया तो फिर अंतिम हस्ताक्षर करने वाले चिदंबरम अकेले कैसे दोषी हो सकते हैं। आइएनएक्स केस में पूर्व वित्तमंत्री को किंगपिन बताने के आरोपों पर भी पलटवार करते हुए पार्टी ने कहा कि हकीकत यह है कि कांग्रेस और चिदंबरम को बदनाम करने वाले किंगपिन सरकार में हैं।

चिदंबरम के बचाव में उतरे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने पार्टी की आधिकारिक प्रेस कांफ्रेंस में यह सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा। जयराम ने कहा कि तथ्यों से स्पष्ट है कि चिदंबरम के खिलाफ बनाया गया यह केस राजनीतिक प्रतिशोध का सर्वोत्तम उदाहरण है।

एफडीआई निवेश को मंजूरी दी

अपने इस दावे को सही साबित करने के लिए जयराम ने एफआइपीबी और वित्त मंत्रालय की एफडीआई निवेश को मंजूरी देने की स्थापित प्रक्रिया का हवाला दिया। उनका कहना था कि एफडीआइ मंजूरी के लिए 20 साल से अधिक समय से एक प्रक्रिया तय है जिसके एफआइपीबी में केंद्र सरकार के छह मंत्रालयों के सचिव होते हैं। आइएनएक्स के प्रस्ताव को इसी के अनुरूप छह सचिवों के हस्ताक्षर से एफआइपीबी ने हरी झंडी देकर वित्त मंत्रालय भेज दिया, जहां वित्त सचिव समेत पांच अधिकारियों ने इसका अध्ययन कर अपने हस्ताक्षर किए।

चिदंबरम ने किए थे आखिरी हस्ताक्षर

जयराम रमेश ने कहा कि एफआइपीबी और वित्त मंत्रालय के 11 अधिकारियों के हस्ताक्षर के बाद चिदंबरम ने आखिरी हस्ताक्षर किए तो उन्हें अकेले आरोपी बनाना कैसे जायज हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 11 अधिकारियों ने कोई गलती नहीं कि तो फिर 12वां हस्ताक्षर करने वाले चिदंबरम एकलौते दोषी कैसे हो गए।

कोई अधिकारी दोषी नहीं है

वित्तमंत्री के नाते चिदंबरम ने 28 मई 2007 को 23 अन्य एफडीआई प्रस्तावों के साथ आइएनएक्स के प्रस्ताव को मंजूरी देने का हस्ताक्षर किया था। कांग्रेस नेता ने साफ किया कि अधिकारियों को लेकर सवाल उठाने का उनका आशय यह नहीं कि वे दोषी हैं बल्कि जैसा चिदंबरम ने अपने बयान के जरिए स्पष्ट कर दिया है कि कोई अधिकारी दोषी नहीं है। इसीलिए किसी भी अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए।

चिदंबरम के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना

जयराम ने कहा कि इस सवाल के जरिए वे आइएनएक्स केस में चिदंबरम के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई कार्रवाई की तस्वीर स्पष्ट करना चाहते हैं। तथ्य से बिल्कुल साफ है कि चिदंबरम को बदनाम कर उनका चरित्रहनन करने के लिए उनके खिलाफ किंगपिन जैसे शब्दों को इस्तेमाल साजिशन किया गया है।

चिदंबरम को बदनाम करने वाले किंगपिन सरकार में हैं

जयराम ने कहा कि सच्चाई यह है कि कांग्रेस और चिदंबरम को बदनाम करने वाले किंगपिन सरकार में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिस फिलॉसफी के आधार पर चिदंबरम को तिहाड़ भेजा गया है अगर यही सोच रही तो कोई मंत्री किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। 

Posted By: Bhupendra Singh

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